नाम गजेंद्र द्विवेदी गिरीश
राज्य छत्तीसगढ़ भिलाई 3
संपर्क 7000858588
शीर्षक - पी रहा हूँ मैं
राज्य छत्तीसगढ़ भिलाई 3
संपर्क 7000858588
शीर्षक - पी रहा हूँ मैं
कभी ख़ुशी में कभी गम में, पी रहा हूँ मैं!
इस तरह मौत से लड़कर, जी रहा हूँ मैं!!
इस तरह मौत से लड़कर, जी रहा हूँ मैं!!
हर तरफ शोर का आलम है, बदगुमानी है,
सच को भी ताले में जड़कर, पी रहा हूँ मैं!!
सच को भी ताले में जड़कर, पी रहा हूँ मैं!!
मुंह बाँधना है तो बुरी बातों को रोको तुम,
बेखबर, नए धागों से बंधकर, पी रहा हूँ मैं
बेखबर, नए धागों से बंधकर, पी रहा हूँ मैं
लोगों ने बिछाकर रखे जाल तरह तरह के,
जानता हूँ सब मगर फंसकर, पी रहा हूँ मैं
जानता हूँ सब मगर फंसकर, पी रहा हूँ मैं
बहाने रोज नए बनाते हैं फसादी तो यहाँ,
चुनौतियों में फिर भी पड़कर, पी रहा हूँ मैं
चुनौतियों में फिर भी पड़कर, पी रहा हूँ मैं
किसे पता है सांस कबतक चलती रहेगी,
चंद कदम खुद ही बढकर, पी रहा हूँ मैं!!
चंद कदम खुद ही बढकर, पी रहा हूँ मैं!!
तेरे हिसाबों की गिरीश को नहीं है परवाह,
जीने की नयी कहानी गढ़कर, पी रहा हूँ मैं!!
जीने की नयी कहानी गढ़कर, पी रहा हूँ मैं!!
(C) गिरीश

Mast
ReplyDeleteबहुत ही उम्दा रचना है
ReplyDeleteलाजवाब रचना भैया जी
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