कवि का नाम-चन्द्रभान सिंह अनु
शीर्षक-मौसम
राज्य-राजस्थान
शीर्षक-मौसम
राज्य-राजस्थान
।। मौसम ।।
गाँव कि चौपाल पर बगुलों का जमघट,
टर्र-टर्र करते दो कौड़ी के मेढ़क,
मौहल्ले-मौहल्ले घूमते जहरीले सर्प,
ढाणी-ढाणी में चल रही खरीद-फरोख्त,
नशे में डगमगाता लाचार गरीब,
गाँव मे उड़ती गाड़ियों कि धूल,
देर रात तक अलाव तापते साइबेरियन,
रजाई में दुबका पड़ा सज्जन,
जीत -हार की गणित बैठाते चाणक्य,
कुछ इस तरह का मौसम है आजकल गाँव का।
रात के सन्नाटे को तोड़ता कुत्ता,
काली कम्बली में इस घर से उस घर मे घुसता नेता,
रात के अंधेरे में शराब बांटते गिद्ध,
झपट लेने को आतुर गरीब,
अंधेरी रात में गेंहू बाँटता दानी,
झोली भर कर धन्य होता भिखारी,
गिने-चुने गणमान्य को धन बाँटता कुबेर,
मतदान के दिन नेता के लग जाता वोटों का ढ़ेर,
कुछ इस तरह का मौसम है आजकल गाँव का...।
गाँव कि चौपाल पर बगुलों का जमघट,
टर्र-टर्र करते दो कौड़ी के मेढ़क,
मौहल्ले-मौहल्ले घूमते जहरीले सर्प,
ढाणी-ढाणी में चल रही खरीद-फरोख्त,
नशे में डगमगाता लाचार गरीब,
गाँव मे उड़ती गाड़ियों कि धूल,
देर रात तक अलाव तापते साइबेरियन,
रजाई में दुबका पड़ा सज्जन,
जीत -हार की गणित बैठाते चाणक्य,
कुछ इस तरह का मौसम है आजकल गाँव का।
रात के सन्नाटे को तोड़ता कुत्ता,
काली कम्बली में इस घर से उस घर मे घुसता नेता,
रात के अंधेरे में शराब बांटते गिद्ध,
झपट लेने को आतुर गरीब,
अंधेरी रात में गेंहू बाँटता दानी,
झोली भर कर धन्य होता भिखारी,
गिने-चुने गणमान्य को धन बाँटता कुबेर,
मतदान के दिन नेता के लग जाता वोटों का ढ़ेर,
कुछ इस तरह का मौसम है आजकल गाँव का...।

No comments:
Post a Comment