Monday, November 4, 2019

राजस्थान से कवि चंद्रभान सिंह "अनु" की रचना- दुर्भाग्य तुझसे होड़ है मेरी

कवि का नाम- चन्द्रभान सिंह 'अनु'
राज्य-राजस्थान
शीर्षक:-"दुर्भाग्य तुझसे होड़ है मेरी"


भाग्य-भाग्य जन पुकारता,
      मैं दुर्भाग्य को ललकारता।
अभिमन्यु कि तरह खड़ा समर में,
     विपदाओं ने डाला डेरा ।
एक दुर्योधन क्या कम था?
     द्रोण, भीष्म,कर्ण ने भी आकर  घेरा ।
अभिमन्यु का साहस न कम था,
   फिर उसने व्यूह-चक्र को भेदा।
        उठ जाग अभिमन्यु-सा साहस दिखा,
     करना है, विपदाओं का डटकर सामना।
यँहा कौन बनकर आएगा कृष्ण,
     यँहा तो सभी बने हैं कंश।
आज परीक्षा कि घड़ी आई तेरी,
दुर्भाग्य तुझसे होड़ है मेरी।।
भाग्यशाली इठलाकर चलते,
     तुझ पर फब्तियां कसते।
माना दुर्भाग्य को मात देना है कठिन,
      इस संसार-सागर में सब कुछ है मुमकिन।
मेहनत पसीने से जीवन को सींच,
    एक दिन सुफल फूटेगा।
बार-बार असि वार कर,
      एक दिन दुर्भाग्य भी टूटेगा।
तू धीर धर आत्मविश्वास जगा,
     फिर देख दुर्भाग्य भी समर छोड़ भगा।
विजयमाला तेरे गले मे होगी,
    तेरे पीछे दोस्तों कि टोली होगी।
उस दिन जय जयकार होगी तेरी,
  दुर्भाग्य तुझसे होड़ है मेरी।।

4 comments:

  1. बहुत ही प्यारी कविता.... बधाई हो भाई

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  2. लाजवाब श्रीमान् जी

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  3. थैंक्स सर जी।

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