नाम - विश्वनाथ देवांगन"मुस्कुराता बस्तर"
शीर्षक :- "बालदिवस..."
राज्य- छत्तीसगढ़
संपर्क - 07999566755
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"बाल दिवस "
!
कभी,
कारखाने की धुआं,
नहला देती हैं,
कभी ग्रीस ऑइल,.
हमें दहला देती हैं,
सब अपने मजे लेती हैं,
मेम साब,
पेट का सवाल है,
कहते दुनिया मालामाल है,
देखिये ना....,
बेलबॉटम हमारा,
लग रहे न.....,
झकास.....ऐसा च,
बादशाह के माफिक,
फिर... कैसे कंगाल हैं,
क्या.....करें लग जाते हैं,
सुबह से....,
क्या अजान,प्रार्थना,आरती,
हमारी तो बॉस,
मां सिर्फ भारती,
पॉलीथीन की बोरी,
पीठ पर लादकर,
तंग गलियों में,
हम बैठे बच्चे,
जो कुड़े कचरे के ढेर से,
कबाड़ बीन रहे,
कोई पेट नाप रहा,
मन में,
रोटी सेंक रहा,
कोई लार टपका रहा,
जलेबी घूम रहीं,
नजर के सामने,
कहीं किसी को,
दिख नहीं रहा पेट की आग,
माइक पर,
चिकनी चुपड़ी बातें,
दिलाशा भरे लच्छेदार भाषण,
कबाड़ की ओर,
देखकर पेट,
कातर मौन संभाषण,
चका-चौंध निगल जाती हैं,
सपने दब जाते हैं,
कोई तंग गलियों में,
पल रहे बच्चों की सुध ले,
वोट के वक्त नोट,
और दारू की बोतल,
कुछ जूठे की,
तलाश कर भी लें,
होटलों और बड़े घरानों के पास,
चोर की तरह इल्जामात,
पेट का ना कोई पूजारी,
न रोटी का कोई इमाम,
फटा बूट,
फेंके कपड़े,
बहुत अच्छे जंचते हैं साहब,
मस्त सजते हैं,
देखिये ना,
न टाई न कोट के लफड़े,
सब कुछ,
टॉप टू बॉटम,
मड से लथपथ,
हमारा ये बेलबॉटम,
कोई बात नहीं,
साब.....,
हम तो चलेंगे,
बेचारे 'बापू' हैं न... साब,
सुपारी में भी शगुन में भी,
हम तो यूं ही हैं,
उनके ही जैसे,
जो चाहे जी कर लो,
टूकड़ों में पेट पालने को,
तंग बदहाल विवश,
अच्छा हां,.....जी,साब,
यहां आज नहीं ढूंढेंगे,
आपके होटल,
ढाबा बार के सामने,
आज अपुन भी,
छुट्टी मनायेगा,
गुलाब सटकायेगा,
किसी बाग से,
कोट में लगाने का,
वो आपके बच्चे भी,
लगाते ना 'चाचा'की तरह गुलाब,
वो इधर ही,
खेलेंगे आज ना,
टेंशन नहीं लेने का,
मेम साब,
आज हम नहीं दिखेगें,
इधर..... को,
दूसरी गली में चल देंगे,
हमें भी पता है,
बोले तो...,
आज है ना,
आपका बाल दिवस |
©®✍
विश्वनाथ देवांगन"मुस्कुराता बस्तर"
कोंडागांव,बस्तर,छत्तीसगढ़
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