(बाल दिवस के उपलक्ष्य में)
नाम-प्रज्ञा जैमिनी
शीर्षक- कायदा
राज्य- दिल्ली
अध्यापिकाजी गणित पढ़ा रहीं थीं
सामान्य उदाहरणों से सरल बना रही थीं
जमा-घटा सिखा रही थीं
रिश्तों का समीकरण भी समझा रही थीं
एक विद्यार्थी से पूछा उन्होंने-
अपनी उम्र बताओ।
विद्यार्थी बोला-आठ साल
अध्यापिकाजी ने सिर हिलाया,फिर फरमाया-
अपने पिताजी की उम्र में से अपनी उम्र घटाओ,
शेष क्या रहा, ज़रा बताओ?
विद्यार्थी बोला- कुछ नहीं, सिर्फ शून्य ।
गलत जवाब पाकरभी अध्यापिकाजी हुई नहीं निराश,
पुनः समझाने के लिए गईं उसके पास
बड़े प्यार से उन्होंने उससे पूछा-
अपने पिताजी की उम्र बताओ।
विद्यार्थी बोला -आठ साल ।
उत्तर सुन अध्यापिकाजी हो गईं हैरान- परेशान
बोलीं-यह तो है असंभव!
तुम और पिता जी दोनों की उम्र आठ साल
तुम्हारेजवाब ने किया है मुझे बेहाल
अध्यापिकाजी देख ने बैठी फौरन रजिस्टर खोल
ज़रा खोलूँ इस तथ्य की पोल
देखी पिता- पुत्र दोनों की जन्मतिथि
फिर बोली- बेटा, रिकार्ड तो बताता है
तुम्हारेपिता की उम्र तीस साल
फिर तुम क्यों बता रहे हो उनकी उम्र आठ साल
वह बोला- माना उन्हें पैदा हुए हो गए हैं तीस साल
लेकिन पिता तोबने हुए हैं ,उन्हें केवल आठ साल
आखिर पिता तो वह तभी बने न
जब मैं हुआ पैदा
अब आप ही बताइए- क्या सही नहीं है मेरा कायदा?
विद्यार्थी का देख अंदाज और जवाब निराला
अध्यापिकाजी के मुँह पर लग गया ताला
प्रज्ञा जैमिनी
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