Thursday, November 14, 2019

दिल्ली से तालिब मंसूरी की रचना- इश़्क

नाम -तालिब मंसूरी
दूरभाष -7860247454
राज्य -दिल्ली
शिर्षक -पैसे वाला इश्क

महज चन्द सिक्कों ने खरीद लिया है इश्क ,
हम वफा की डिग्री लिए यूँ ही तनहा रह गए |

क्या-2 ख्वाब सजाये थे जब हम दोनो एक थे ,
कितनी कसमें खाई तुमने कितने तोड़े वादे गए |

वो जो किया था इश्क था य़ा महज एक खेल था
जो भी था खैर हम उसको इश्क समझते रह गए |

दर्द जो देकर गया वो कोई और नहीं अपना ही था
एक मेरी हिम्मत देखिये हम भी मुस्कराकर सह गए |

उठकर गया था महफ़िल से ना जाने क्या सबब था ,
आ रहा हूँ अभी "तालिब" बस यही मुझसे कह गए |

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