कवि-अजयशेखर नेताम "नैऋत्य"
शीर्षक- कार्तिक पुन्नी
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- कार्तिक पुन्नी
राज्य- छत्तीसगढ़
★कार्तिक पुन्नी कविता★
*************
बिहिनिया बिहिनिया ले जुड़ के बेरा,
कार्तिक पुन्नी असनादे हे ।
दियना ढिलेन गंगा मईया मे,
भोला में जल चढ़हाये हे ।।
लईका पिचका जम्मो जयकारा लगाके,
भोला के दर्शन ला पाये हे ।
राख भस्म गुलाल के तिलक,
फूल पान नरियर ल चढ़हायें हे ।।
भाव भजन में लीन सब्बो,
रघुपति राघव राजा राम ला गाये हे ।
झांझ मंजीरा मृदंग के सुर म,
झुमका ला बजाये हे ।।
अंवरा के रुख तरी भजिया बरा,
अऊ ख़िरपुड़ी ल बनावत हे ।
पूजा करके सिंगार चढ़हा के,
परसाद पाहू कहिके जम्मो ला बलावत हे ।।
मंझनिया के बेरा कार्तिक पुन्नी,
मेला देखें बर जावत हे ।
आनी बानी के खेल खेलौना लेवे,
मेवा मिठाई मुसुरे मुसुर खावत हे।।
बड़ भाग मानी अजय हर,
ये पावन दिन ला पाये हे ।
शंकर बोला अऊ गंगा,पूर्वज ले,
आशिष के आस लगाये हे ।।
अजयशेखर नेताम "नैऋत्य"
अमलोर (महासमुंद)
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बिहिनिया बिहिनिया ले जुड़ के बेरा,
कार्तिक पुन्नी असनादे हे ।
दियना ढिलेन गंगा मईया मे,
भोला में जल चढ़हाये हे ।।
लईका पिचका जम्मो जयकारा लगाके,
भोला के दर्शन ला पाये हे ।
राख भस्म गुलाल के तिलक,
फूल पान नरियर ल चढ़हायें हे ।।
भाव भजन में लीन सब्बो,
रघुपति राघव राजा राम ला गाये हे ।
झांझ मंजीरा मृदंग के सुर म,
झुमका ला बजाये हे ।।
अंवरा के रुख तरी भजिया बरा,
अऊ ख़िरपुड़ी ल बनावत हे ।
पूजा करके सिंगार चढ़हा के,
परसाद पाहू कहिके जम्मो ला बलावत हे ।।
मंझनिया के बेरा कार्तिक पुन्नी,
मेला देखें बर जावत हे ।
आनी बानी के खेल खेलौना लेवे,
मेवा मिठाई मुसुरे मुसुर खावत हे।।
बड़ भाग मानी अजय हर,
ये पावन दिन ला पाये हे ।
शंकर बोला अऊ गंगा,पूर्वज ले,
आशिष के आस लगाये हे ।।
अजयशेखर नेताम "नैऋत्य"
अमलोर (महासमुंद)

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