नाम -सावित्री मिश्रा
राज्य-ओडिशा
सम्पर्क -
शीर्षक -माँ और बेटी
राज्य-ओडिशा
सम्पर्क -
शीर्षक -माँ और बेटी
माँ और बेटी
आग सी सूरज की रोशनी से ,
तेजाब सी पानी की बूंदों से,
जहर घुला सा लगता है हवाओं में।
हे माँ! छुपा लो मुझे तुम इन सब से,
मुझे डर लगता है बाहर निकलने से।
तुमने मुझे नाजुक फूलों सा पाला था,
अपनी ममता के आँचल में डाला था।
किन्तु समाज के भयानक दरिन्दों ने,
मेरी आत्मा तक को चीर डाला था।
माँ तेरा सपना क्या कभी सच होगा,
मेरा जीवन खुशियों से भर जाएगा?
हाँ तेरा सपना भी एक दिन सच होगा,
तेरी शिक्षा ,तेरा आशीष मेरी ताकत बनेगा ।
सावित्री मिश्रा
झारसुगुड़ा ,ओडिशा
तेजाब सी पानी की बूंदों से,
जहर घुला सा लगता है हवाओं में।
हे माँ! छुपा लो मुझे तुम इन सब से,
मुझे डर लगता है बाहर निकलने से।
तुमने मुझे नाजुक फूलों सा पाला था,
अपनी ममता के आँचल में डाला था।
किन्तु समाज के भयानक दरिन्दों ने,
मेरी आत्मा तक को चीर डाला था।
माँ तेरा सपना क्या कभी सच होगा,
मेरा जीवन खुशियों से भर जाएगा?
हाँ तेरा सपना भी एक दिन सच होगा,
तेरी शिक्षा ,तेरा आशीष मेरी ताकत बनेगा ।
सावित्री मिश्रा
झारसुगुड़ा ,ओडिशा

भावनात्मक सहृदयता...उत्कृष्ठ लेखनी
ReplyDeleteमंचन के लिए सादर आभार जीजी
पीडिता का दर्द का सुंदर चित्रण। समाज जब तक सभ्य नहीं हो जाता।,तब तक हम मुक्त विचरण नहीं कर सकते
ReplyDeleteबेहद मार्मिक, बेहतरीन लेखन के लिए बधाई दीदी जी ।
ReplyDeleteबहुत ही मार्मिक लेख समाज की विडंबना है कि लोग अपनी माँ बहन की इज्जत तो करते है ,लेकिन वैसे ही दूसरे के माँ बहन को नही देख पाते भूल जाते है ।उत्कृष्ठ लेख बहन ,सादर प्रणाम।
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