नाम -नलिनी बाजपेयी
शीर्षक-आकांक्षा
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-आकांक्षा
राज्य-छत्तीसगढ़
आकांक्षा
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चाहत थी मेरी अभिलाषा भी,
जन्म लूं जननी तेरे कोख से ये
आकांक्षा थी।
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चाहत थी मेरी अभिलाषा भी,
जन्म लूं जननी तेरे कोख से ये
आकांक्षा थी।
तेरे मधुर स्मित अधरों की
सोची मुस्कान बनूंगी,
किलकारी कल्लोल से आंगन
सोची गुलजार करूंगी।
सोची मुस्कान बनूंगी,
किलकारी कल्लोल से आंगन
सोची गुलजार करूंगी।
गोद नवल,बाल नवल बन सोची
दुनियां तेरी आबाद करूंगी।
उम्मीदों को अंजलि में समेटे
सोची रोशन जहां करूंगी।
दुनियां तेरी आबाद करूंगी।
उम्मीदों को अंजलि में समेटे
सोची रोशन जहां करूंगी।
बेटे की मोह ने मुझे मिटा दिया,
सृष्टि बीज बन सोची नव निर्माण करूंगी।
आकांक्षा बन जीती,पुत्र आकांक्षा
में सोची न थी मिटा करूंगी।
सृष्टि बीज बन सोची नव निर्माण करूंगी।
आकांक्षा बन जीती,पुत्र आकांक्षा
में सोची न थी मिटा करूंगी।
तेरी खुश्बू तेरी आबोहवा से
सोची श्रृंगार करूंगी,
तेरे संस्कारों की सोंधी गन्ध ले
कभी दो कुलों का उद्धार करूंगी।
सोची श्रृंगार करूंगी,
तेरे संस्कारों की सोंधी गन्ध ले
कभी दो कुलों का उद्धार करूंगी।
ये क्या हुआ मां तुम्हें पीड़ा नही,
सोची नहीं वेदना से तड़पा करूंगी।
लक्ष्मी, दुर्गा,श्रद्धा उर्मिला,से
सोची जग में नाम करूंगी।
सोची नहीं वेदना से तड़पा करूंगी।
लक्ष्मी, दुर्गा,श्रद्धा उर्मिला,से
सोची जग में नाम करूंगी।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)
संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)

भाव योजना अद्भुत है।
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