नाम - राहुल कुमावत
शीर्षक - "बचपन"
पता - राजस्थान
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‘’बचपन’’
समझदारी के दौर में
नादानीयाँ टटोलता हूँ
फीकी सी जिन्दगी में
कुछ रंग घोलता हूँ
पन्नो पर जिसके है
मासूमियत लिखी हुई
चलो आज बचपन की
वो किताब खोलता हूँ
मासूमियत दिल में लिए
आँखों में लिए हैरानियाँ
सुनते थे रोज किस्से नए
और नयी-नयी कहानियाँ
हँसते-रोते,लड़ते-झगड़ते
करते थे,बस मनमानियाँ
याद आती है अब भी मुझको
वो बचपन की नादानियाँ
बारिश के मौसम में अक्सर
कागज़ की नाव चलाते थे
नोटों से कागज़ के,दूर थे तब
सिक्कों से मन भर जाते थे
लगता था स्कूल मैदान-ए-जंग
बहाने रोज बनाते थे
छुट्टियाँ गर्मियों की,वरदान थी
जब नानी के घर जाते थे
कुछ भी कहो उस बचपन का
हर खेल बहुत निराला था
अपनी मर्जी और जिद के आगे
कोई ना टिकनेवाला था
वो ख्वाब था हंसी कोई
जो चाहा वो मिल गया
कांच सा पारदर्शी,फूल सा नाजुक
और रेत सा,फिसल गया
बचपन का दौर,जैसे कोई
खेल सा,निकल गया
नाम- राहुल कुमावत
पता - श्रीमाधोपुर (सीकर)
राजस्थान
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