नाम - रश्मि शाही शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़
रायपुर, छत्तीसगढ़
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ये क्या गजब करती हो
क्यूँ किसी की नहीं सुनती हो
क्यूँ ऐसे ख्वाब बुनती हो...
क्यूँ किसी की नहीं सुनती हो
क्यूँ ऐसे ख्वाब बुनती हो...
मीरा और कृष्ण रखे थे सिरहाने में
कई एक बार माँ कह चुकी थी ताने में...
कई एक बार माँ कह चुकी थी ताने में...
दे चुकी थीं अपनी परम्पराओं की दुहाई मुझे
कितनी बार समझाया समझ ना आई तुझे
भक्त अनन्य रही है कृष्ण की मीरा लेकिन
जग ने मारे उन्हें ताने तीर सारे विष बुझे...
कितनी बार समझाया समझ ना आई तुझे
भक्त अनन्य रही है कृष्ण की मीरा लेकिन
जग ने मारे उन्हें ताने तीर सारे विष बुझे...
तू जिन्हें साथ साथ में है रखती,
नियति के विरूद्ध है ये दिखती ...
नियति के विरूद्ध है ये दिखती ...
तुलसी पूजनीय हैं और मीरा भी...
जीवन दोनों का है मगर पीड़ा भी...
घर के भीतर कोई स्थान न देता इन्हें...1
पूजते हैं आँगन में हों जब तक ये..
जीवन दोनों का है मगर पीड़ा भी...
घर के भीतर कोई स्थान न देता इन्हें...1
पूजते हैं आँगन में हों जब तक ये..
सोचती रहती हूँ मैं अक्सर यूँ ही. ..
प्रेम और भक्ति क्या पर्याय नहीं...???
प्रेम और भक्ति क्या पर्याय नहीं...???

Superb
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