Monday, November 4, 2019

बिहार से कवयित्री डॉ. पूनम झा की रचना- शायद

कवयित्री का नाम - डॉ पूनम झा
राज्य - बिहार
शीर्षक - शायद
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               शायद
कितनी भोली कितनी
              नादान हो तुम,
शायद  किसी शायर की,
            अरमान हो तुम ।
बात-बात पर तुम्हारा,
            मुस्कुरा  देना,
किसी ज़ख्मी ज़िगर
            को यूँ सहला देना ।
एक अनछुए प्यार की
            पहचान हो तुम,
शायद किसी धड़कते
           दिल की ज़ान हो तुम ।
रूठ ना   जाना
          मेरी  बातों से,
ज़िन्दगी गुज़ारी है मैंने
          तेरी यादों से ।
पूछ लेना आकर
           मेरी तन्हा रातों से,
मेरी दुनिया मेरी ज़न्नत
          मेरी जान हो तुम।
शायद मेरी ज़िन्दगी का, 
           मुकम्ल समान हो तुम,
कितनी भोली कितनी
              नादान  हो  तुम ।
ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः
डॉ पूनम झा
दरभंगा, बिहार

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