कवयित्री का नाम - डॉ पूनम झा
राज्य - बिहार
शीर्षक - शायद
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शायद
राज्य - बिहार
शीर्षक - शायद
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शायद
कितनी भोली कितनी
नादान हो तुम,
शायद किसी शायर की,
अरमान हो तुम ।
बात-बात पर तुम्हारा,
मुस्कुरा देना,
किसी ज़ख्मी ज़िगर
को यूँ सहला देना ।
एक अनछुए प्यार की
पहचान हो तुम,
शायद किसी धड़कते
दिल की ज़ान हो तुम ।
रूठ ना जाना
मेरी बातों से,
ज़िन्दगी गुज़ारी है मैंने
तेरी यादों से ।
पूछ लेना आकर
मेरी तन्हा रातों से,
मेरी दुनिया मेरी ज़न्नत
मेरी जान हो तुम।
शायद मेरी ज़िन्दगी का,
मुकम्ल समान हो तुम,
कितनी भोली कितनी
नादान हो तुम ।
ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः
डॉ पूनम झा
दरभंगा, बिहार
नादान हो तुम,
शायद किसी शायर की,
अरमान हो तुम ।
बात-बात पर तुम्हारा,
मुस्कुरा देना,
किसी ज़ख्मी ज़िगर
को यूँ सहला देना ।
एक अनछुए प्यार की
पहचान हो तुम,
शायद किसी धड़कते
दिल की ज़ान हो तुम ।
रूठ ना जाना
मेरी बातों से,
ज़िन्दगी गुज़ारी है मैंने
तेरी यादों से ।
पूछ लेना आकर
मेरी तन्हा रातों से,
मेरी दुनिया मेरी ज़न्नत
मेरी जान हो तुम।
शायद मेरी ज़िन्दगी का,
मुकम्ल समान हो तुम,
कितनी भोली कितनी
नादान हो तुम ।
ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः
डॉ पूनम झा
दरभंगा, बिहार

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