Monday, November 4, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री मीरा आर्ची चौहान की रचना उपहार

कवयित्री -मीरा आर्ची चौहान
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-उपहार


ओ नन्हें से परिंदे
ईश्वर ने दी तुझे
नेमत में ये ज़िंदगी
बेशकीमती वसुधा
खूबसूरत पर्यावरण
हौसलों के पंख
वाणी का वरदान।
उपहार में दिए
बहती नदियां
कल-कल करते
झरने।
झूमती धान की
सुनहरी बालियां।
फिर तू क्यों आंकता है
स्वयं को छोटा।
उठ!याद रख
इसी धरती से नापे थे
बामन भगवान ने
त्रैलोक्य।
उड़!छू ले वो ,,,
क्षितिज
और नाप जा
सारा आसमान।
           मीरा आर्ची चौहान
              कांकेर

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