नाम - डॉ अलका कुमारी
राज्य- झारखंड ( रांची)
शीर्षक- कठिन डगर
राज्य- झारखंड ( रांची)
शीर्षक- कठिन डगर
कठिन डगर
जीवन की इस कशमकश में,
चलती ही जा रही थी।
कोई ओर नही था,
कोई छोड़ नहीं था।
फंसती ही जा रही थी।
क्या पता कब राह मिलेगा,
नई किरणों का आश मिलेगा।
भवर काफी गहरा था।
चारों तरफ दुनिया का पहरा था।
शायद किस्मत की यही मंजूरी थी।
अभी मंज़िल मे थोड़ी दूरी थी।
इस कशमकश रूपी नैया में
होकर सवार चलती ही जा रही थी।
थक गई, मैं हार गई।
दोतरफा राह पकड़
खुद को ना संभाल सकी।
एक तरफ मंजिल थी,
एक तरफ साहिल था।
असमंजस की इस लहर में
बहती ही जा रही थी।
डगर कठिन था पर
जीवन की इस दोराहे
पर खुद को मजबूर पा रही थी।
उलझन के इस भवर में
फंसती ही जा रही थी।
चलती ही जा रही थी।
कोई ओर नही था,
कोई छोड़ नहीं था।
फंसती ही जा रही थी।
क्या पता कब राह मिलेगा,
नई किरणों का आश मिलेगा।
भवर काफी गहरा था।
चारों तरफ दुनिया का पहरा था।
शायद किस्मत की यही मंजूरी थी।
अभी मंज़िल मे थोड़ी दूरी थी।
इस कशमकश रूपी नैया में
होकर सवार चलती ही जा रही थी।
थक गई, मैं हार गई।
दोतरफा राह पकड़
खुद को ना संभाल सकी।
एक तरफ मंजिल थी,
एक तरफ साहिल था।
असमंजस की इस लहर में
बहती ही जा रही थी।
डगर कठिन था पर
जीवन की इस दोराहे
पर खुद को मजबूर पा रही थी।
उलझन के इस भवर में
फंसती ही जा रही थी।
✍ डॉ अलका कुमारी
( झारखंड) रांची✍
( झारखंड) रांची✍

बहुत ही सुन्दर रचना
ReplyDeletesundar pankti
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