Wednesday, November 6, 2019

महाराष्ट्रा से संजय जैन की रचना जमाने को समझो

संजय जैन (मुम्बई)
मो.9987699021
राज्य : महाराष्ट्रा
विधा: कविता
शीर्षक : जमाने को समझो
कही गम है तो कही खुशी।
कही मोहब्बत तो कही टकरार।
कही मिलना तो कही बिछाना।
कही जिंदगी तो कही मौत।
बड़ा ही अजीब है
इस जमाने का दृश्य।।
जो जमाने को समझा
और उसी अनुसार ढल गया।
वो मानो मौज मस्ती से जी गया।
जो जमाने को नही समझा
वो चिंताओं के जाल में फस गया।
और जिंदगी को अलग दिशा में ले गया।।
कलयुगी जमाने मे
सभी मतलबी नही होते।
कुछ तो कलयुग में भी
हटकर होते है।
माना कि आज का जमाना खराब है।
फिर भी कुछ रिश्ते तो
सदयुग जैसे होते है।।
इसलिए जमाने को देखो,
समझो और आगे बढ़ो।
फिर जो चाहोगे
वो मिल जाएगा।
और कलयुग में भी 
इतिहास लिखा जाएगा।।
संजय जैन (मुम्बई)

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