Monday, November 18, 2019

राजस्थान से गोविन्द सिंह राव की रचना- किसान की व्यथा

कवि - गोविन्द सिंह राव
शीर्षक - किसान की व्यथा ।
राज्य - राजस्थान
सम्पर्क -9772664818


कितना भोला होता है किसान ।
सपने देखता है अमीर होने के।
इतराता है अपनी फसल पर,
पुलकित होता है, मुस्कराता है अकेले में ।
और अपनी जोरु से कहता है ,
गौरी सुन तो !
अबकी बार फसल अच्छी होगी।
तुझे नई ओढ़नी और भूरी को कमीज दिलाउंगा।
बापू की खाँसी का ईलाज भी करवाऊंगा ,
शहर जाकर ।
मगर.................मगर......
रात में बिजली चमकी,
बादल गरजे,
बरसात हुई ।
बिछ गई ओढ़नी ओलो के नीचे।,
भूरी की कमीज भी धूल गई थी पानी में ।
और ................और ............
बापू की खांसी बदल गई थी सिसकियों में ।
              जी हाँ
एक किसान ने कर ली थी आत्महत्या ।
और ये खबर  अखबार के एक कोने में पड़ी ,
विकास का मुंह चिढा रही थी।
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17 comments:

  1. Nice Rao saheb hame aap par garv hai

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  2. किसान की व्यथा का यथार्थ चित्रण

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  3. हृदय स्पर्शी रचना,आभार

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  4. हृदय को छूने वाली रचना

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  5. वाह कविराज प

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