Monday, November 18, 2019

झारखंड से डॉ अलका कुमारी की रचना- आपका साथ

नाम डॉ अलका कुमारी
( झारखंड) रांची 
शीर्षक- आपका साथ 
        आपका साथ
ममतामई आंचल को छोड़,
बढ़ चली अपने सफर की ओर।
कुछ बड़ी असमंजस आई,
चारों तरफ मिली तनहाई।
  
       अकेला सफर था,
        दिल में एक डर था,
        मंजिल मेरी चाहत थी,
       जिसे हासिल करना
       मेरी इबादत थी।
आसान नहीं था मंजिल पाना
बिना आपके मुमकिन नहीं था कुछ कर पाना।
आपका साथ मुझे
इस कदर मिला,
मानो अंधियारे में 
साहिल  मिला।
आपके उत्साह ने मुझे,
चलना सिखाया।
कुछ कर दिखाने का
लगन जगाया।
कभी भी सफर में नहीं डरना सिखाया।
मिली असफलता है कई बार ,पर आप ही थी साथ मेरे हर बार।
स्नेह आपका जरूरत बना।
बिना आशीर्वाद सपना लगा।
पढा था मैंने गुरु को,
पर जाना है आज मैंने गुरु को।
उसमें केवल छवि है आपकी।
मां की उंगली छोड़,
शरण मिली है आपकी।
अब काहे का डर है,
सीख आपकी हर पल है।
शुक्रिया और दुआ करूं मैं रब से, कभी भी वंचित नहीं रहूं मैं आपकी आशीर्वाद ,
स्नेह और प्यार से।

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