कवि - गोविन्द सिंह राव
शीर्षक - किसान की व्यथा ।
राज्य - राजस्थान
सम्पर्क -9772664818
शीर्षक - किसान की व्यथा ।
राज्य - राजस्थान
सम्पर्क -9772664818
कितना भोला होता है किसान ।
सपने देखता है अमीर होने के।
इतराता है अपनी फसल पर,
पुलकित होता है, मुस्कराता है अकेले में ।
और अपनी जोरु से कहता है ,
गौरी सुन तो !
अबकी बार फसल अच्छी होगी।
तुझे नई ओढ़नी और भूरी को कमीज दिलाउंगा।
बापू की खाँसी का ईलाज भी करवाऊंगा ,
शहर जाकर ।
मगर.................मगर......
रात में बिजली चमकी,
बादल गरजे,
बरसात हुई ।
बिछ गई ओढ़नी ओलो के नीचे।,
भूरी की कमीज भी धूल गई थी पानी में ।
और ................और ............
बापू की खांसी बदल गई थी सिसकियों में ।
जी हाँ
एक किसान ने कर ली थी आत्महत्या ।
और ये खबर अखबार के एक कोने में पड़ी ,
विकास का मुंह चिढा रही थी।
सपने देखता है अमीर होने के।
इतराता है अपनी फसल पर,
पुलकित होता है, मुस्कराता है अकेले में ।
और अपनी जोरु से कहता है ,
गौरी सुन तो !
अबकी बार फसल अच्छी होगी।
तुझे नई ओढ़नी और भूरी को कमीज दिलाउंगा।
बापू की खाँसी का ईलाज भी करवाऊंगा ,
शहर जाकर ।
मगर.................मगर......
रात में बिजली चमकी,
बादल गरजे,
बरसात हुई ।
बिछ गई ओढ़नी ओलो के नीचे।,
भूरी की कमीज भी धूल गई थी पानी में ।
और ................और ............
बापू की खांसी बदल गई थी सिसकियों में ।
जी हाँ
एक किसान ने कर ली थी आत्महत्या ।
और ये खबर अखबार के एक कोने में पड़ी ,
विकास का मुंह चिढा रही थी।
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आभार
ReplyDeleteNice Rao saheb hame aap par garv hai
ReplyDeleteकिसान की व्यथा का यथार्थ चित्रण
ReplyDeleteआभार
Deleteहृदय स्पर्शी रचना,आभार
ReplyDeleteआभार
DeleteGreat
ReplyDeleteधन्यवाद जी
DeleteGreat
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteहृदय को छूने वाली रचना
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteवाह कविराज प
ReplyDeleteआभार साहब
DeleteSuper Rao saheb
ReplyDeleteआभार सर जी
DeleteNice guru ji
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