कवयित्री :- अंजली झा
शीर्षक :- दहेज (लघुकथा)
राज्य :- दिल्ली
संपर्क :-
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दहेज....
आज रितु के घर लड़के वाले आ रहे थे। रितु को देखने के लिए रितु के पिता ने खूब ठाट-बाट से लड़के वाले की खातिरदारी करी। उन्होंने उनके बैठते ही अपनी पगड़ी उनके पैर के नीचे रख दिया और जमीन पर बैठ गए भई लड़के वाले थे झुकना तो पड़ता ही तब जाकर अच्छा रिश्ता हाथ में आता। लड़के वालों ने रितु को देखा और शादी की बात आगे बढ़ाई उन्होंने कहा भाई देखिए हमारा बेटा खूब पढ़ा लिखा और संस्कारी है ऊपर से आपकी बेटी की किस्मत भी अच्छी है मेरा बेटा सरकारी अफसर है तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं दहेज में एक गाड़ी ,मोटरसाइकिल और घर का सारा सामान चाहिए नेक मैं दस लाख नगद चाहिए एक-दो लाख कम भी हो जाए तो कोई दिक्कत नहीं है ।इतना सुनते ही रितु के पिता थोड़ा घबरा से गए। रितु वहां से उठी और उसने शादी के लिए मना कर दिया और कहाँ अगर आपका बेटा संस्कारी होता तो मेरे पिता की पगड़ी उनके सर पर होती और वह आपके साथ बैठे होते हैं । आपके बेटे की संस्कार ने ही बता दिया आप का खानदान कैसा हैं ।मुझे यह रिश्ता नहीं मंजूर क्या बिना दहेज की शादी नहीं हो सकती या फिर आप के अफसर बेटे को यह नहीं पता दहेज एक अभिशाप है। इनको इसके लिए जेल भी हो सकती है मैं पहले समझती थी की हमारा समाज ही गंदा है। पर सच्चाई यह है की समाज में रह रहे लोगों ने गंदगी फैला रखी है। अगर आज हम अच्छा करेंगे तभी तो समाज सुधरेगा। जा कर देखिए उन पिता को जिन्होंने अपनी इच्छा खत्म कर दी बेटी के दहेज के लिए। सिर्फ आप जैसे सोच की वजह से हम बेटी अपनी इच्छा जिंदगी भर पूरी नहीं कर पाते इतना बोलते ही वह रोने लगी पिता ने ये देखते ही अपनी बेटी के आँसु पोंछा लड़के वालो को हाथ जोड़ कर शादी के लिए मना कर दिया।
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नाम - अंजली झा ( दिल्ली)
दहेज के विरोध में...
ReplyDeleteएक बहू क्या लेकर आयेगी सब पूछ रहे हैं
मगर एक बेटी अपना क्या छोड़ जायेगी ये तो कोई सोच ही नहीं रहे..👌