कवि का नाम- डॉ. आनंद जी सिंह
विधा- कविता
शीर्षक- "तू जान है मेरी"
राज्य- छत्तीसगढ़
मो.- 9424284155
विधा- कविता
शीर्षक- "तू जान है मेरी"
राज्य- छत्तीसगढ़
मो.- 9424284155
तू जान है मेरी,
आज़ान है मेरी,
तुझे कैसे भूल जाऊं,
अरमान है मेरी।
तुझे सीने लगाया,
और माथे पर सजाया,
लबों पे जो आई,
वो मुस्कान है मेरी।
चला जाऊं अब कैसे,
तड़पाओ मत ऐसे,
तू जिगर का है टुकड़ा,
पहचान है मेरी।
मुझे कहीं नहीं जाना,
बनाओ ना बहाना,
तू आरज़ू है मेरा,
सम्मान है मेरी।
गीत है तू मेरा,
संगीत भी है मेरा,
भगवान ने जो दिया है,
तू वो वरदान है, मेरी।।
आज़ान है मेरी,
तुझे कैसे भूल जाऊं,
अरमान है मेरी।
तुझे सीने लगाया,
और माथे पर सजाया,
लबों पे जो आई,
वो मुस्कान है मेरी।
चला जाऊं अब कैसे,
तड़पाओ मत ऐसे,
तू जिगर का है टुकड़ा,
पहचान है मेरी।
मुझे कहीं नहीं जाना,
बनाओ ना बहाना,
तू आरज़ू है मेरा,
सम्मान है मेरी।
गीत है तू मेरा,
संगीत भी है मेरा,
भगवान ने जो दिया है,
तू वो वरदान है, मेरी।।
डॉ. आनंद जी सिंह
(म.नं.- 03, वर्गीस कॉलोनी,धरमपुरा नं-01, जगदलपुर, जिला- बस्तर,छ. ग.)
(म.नं.- 03, वर्गीस कॉलोनी,धरमपुरा नं-01, जगदलपुर, जिला- बस्तर,छ. ग.)

bahut achi kavita h sir ji🌻🙏
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