Monday, October 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री रश्मि शाही शर्मा की रचना- स्त्री



नाम - रश्मि शाही शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़
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मैं स्त्री हूँ पर स्त्री रही नहीं कभी
फिर भी मुझे परिभाषित करने में लगे हैं सभी
मर्यादाओं की बेड़ियों में जकड़ कर
हाथ कंगन, पाँव पायल पहन कर
मैं दिखती स्त्री हूँ, पर हूँ नहीं
मैं सहनशीलता से संवारती हूँ घर भी...
और कर्मठता से संभालती हूँ जग भी...
मेरी स्वच्छंद हँसी, मेरे स्वच्छंद विचार,
मेरा अस्तित्व है, मेरा चरित्र नहीं...
छली जाती हूँ अक्सर अपनों से
रूठ जाती हूँ निज सपनों से....
फिर संभालती हूँ स्वयं को - समझा कर....
स्त्री को छलती, उसके अस्तित्व को रौंदती
अपने कलुषित विचारों को उस पर थोपती,
स्वच्छंदता को निर्लज्जता कहती
अक्सर एक दूसरी स्त्री ही होती है
अगर स्त्री ऐसी होती है..
.... तो हाँ....
मैं दिखती स्त्री हूँ... पर स्त्री रही नहीं कभी....
रश्मि...

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