Monday, October 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि एस के नीरज की रचना- ग़ज़ल


रचनाकार -  एस के नीरज
राज्य -  छत्तीसगढ़
दूरभाष -  99770-45540
शीर्षक -  एक गजल
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पुलिस नहीं चालान से डर लगता है
अब तो जेल जाना भी घर लगता है
भाई से कहा था मत चलाया कर गाड़ी
पर वो तो अब भी बेखबर लगता है
गाँव गाँव पहुँच गयी बिजली और सड़कें
अब तो पूरा इलाका ही शहर लगता है
मिलावटों के इस दौर में सेहत कहाँ पाएं
अब तो फल खाना भी जहर लगता है
गजल लिखने का शौक मुझे था नहीं कभी
ये सब कवियों की संगत का असर लगता है !
  एस के नीरज "  विद्रोही "

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