रचनाकार - एस के नीरज
राज्य - छत्तीसगढ़
दूरभाष - 99770-45540
शीर्षक - एक गजल
*-*-*-*-*-*
पुलिस नहीं चालान से डर लगता है
अब तो जेल जाना भी घर लगता है
राज्य - छत्तीसगढ़
दूरभाष - 99770-45540
शीर्षक - एक गजल
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पुलिस नहीं चालान से डर लगता है
अब तो जेल जाना भी घर लगता है
भाई से कहा था मत चलाया कर गाड़ी
पर वो तो अब भी बेखबर लगता है
पर वो तो अब भी बेखबर लगता है
गाँव गाँव पहुँच गयी बिजली और सड़कें
अब तो पूरा इलाका ही शहर लगता है
अब तो पूरा इलाका ही शहर लगता है
मिलावटों के इस दौर में सेहत कहाँ पाएं
अब तो फल खाना भी जहर लगता है
अब तो फल खाना भी जहर लगता है
गजल लिखने का शौक मुझे था नहीं कभी
ये सब कवियों की संगत का असर लगता है !
ये सब कवियों की संगत का असर लगता है !
एस के नीरज " विद्रोही "

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