नाम-पवन गौतम बृजराही बमूलिया
सम्पर्क-9116488506
राज्य--राजस्थान
सम्पर्क-9116488506
राज्य--राजस्थान
*आत्मा*
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गीतिका (पैरोडी)
(धुन --तुम्हारी नजरों में हमने देखा,,,,,!!)
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अन्तस में जाकर जब हमने देखा आभा ज्योति चमक रही थी ।
वहीं इंगला वहीं पिंगला और सुृुृषुम्ना दमक रही थी ।
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गीतिका (पैरोडी)
(धुन --तुम्हारी नजरों में हमने देखा,,,,,!!)
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अन्तस में जाकर जब हमने देखा आभा ज्योति चमक रही थी ।
वहीं इंगला वहीं पिंगला और सुृुृषुम्ना दमक रही थी ।
अन्तस में जाकर जब हमनें देखा आभा ज्योति चमक रही थी ।।
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मूलाधार से शून्य चक्र तक हमने देखा अजब नजारा ,
कहीं बीच में परम शांति कहीं स्नेह स्पर्शन प्यारा ।
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मूलाधार से शून्य चक्र तक हमने देखा अजब नजारा ,
कहीं बीच में परम शांति कहीं स्नेह स्पर्शन प्यारा ।
वहीं अष्ट गंधन वितरंगे वहीं दिव्यता महक रही थी।
अन्तस में जाकर जब हमने देखा आभा ज्योति चमक रही थी ।।
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कभी ध्यान में कभी समाधि प्राणो के आयामों को किया था ,
प्रथम इन्द्रियों को मन में भेजा वहीं आतम रूठा पिया था ,
अन्तस में जाकर जब हमने देखा आभा ज्योति चमक रही थी ।।
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कभी ध्यान में कभी समाधि प्राणो के आयामों को किया था ,
प्रथम इन्द्रियों को मन में भेजा वहीं आतम रूठा पिया था ,
तभी ह्रदय के समीप देखा प्रिय आत्मा रमक रही थी ।
अन्तस में जाकर जब हमने देखा आभा ज्योति चमक रही थी ।।
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गहरे समन्दर में गोते खाये अजब अनोखा था आत्म दर्शन,
मन प्राणों का एक होना आत्मा का विश्वात्मा समर्पण।
अन्तस में जाकर जब हमने देखा आभा ज्योति चमक रही थी ।।
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गहरे समन्दर में गोते खाये अजब अनोखा था आत्म दर्शन,
मन प्राणों का एक होना आत्मा का विश्वात्मा समर्पण।
हीरे मोती रत्नेश मानक सभी मणियाँ खनक रही थी।
अन्तस में जाकर जब हमने देखा दिव्य आभा चमक रही थी ।।
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पवन गौतम बमूलिया
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अन्तस में जाकर जब हमने देखा दिव्य आभा चमक रही थी ।।
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पवन गौतम बमूलिया
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