Tuesday, October 15, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि स्वपन बोस की रचना- मन


नाम श्री स्वपन बोस
शिर्षक मन
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मोबाइल ९३४०४३३४८२
मन
मन से जो जीत जाये ।
सच्चा जीवन उसका हो जाता है ।
दुःख दूर हो जाता उसका ,वह अपने आप को पा लेता है ।
                    असंख्य विचारों का समुह हमारा मन बनाता है ।
मन ही वह जादूगर है ।
जो कभी हंसाता कभी रूलाता है।
                      मन ही वह है जो हमें झुठी संसार को भी ,सच जैसा
हमें दिखाता है ।
       ‌लगता है यहां सब मेरे अपने है ।
असल आंख खोलकर देखो तो
जगत सपना नज़र आता है ।
                जनम जनम मानव मन के ,जाल में फंसकर रहता है ,
झुठी माया पाकर बहुत इठलाता है ।
                     दुःख में जब सब अपने साथ छोड़ जाते हैं ,यह मानव , बहुत रोता है ।
              मन के मारे सब है यह ,
कोई शराब के नशा में डूबा है ।
कोई शबाब के नशा में डूबा है ।
               ख़ुश तो केवल वह होता ,जीसके जीवन में ख़ुदा होता है ।
          तोड़ो मन की सोने की बेड़ियों को ,एक उड़ान तो भर दो
          अपना लो ईश्वर को जीवन में , झुठी दुःख को विदाई दे दो ,
            मानव तूं मन नहीं तुझमें
            ईश्वर का अंश है ।
    पहचान लो अपने ,मन को मारकर ।
तोड़ दो जो जीवन का दंश है ।
            मन के हारे हार है ।
             मन के जीते जीत है।
               येही तो संत जनों का गीत है ।

1 comment:

  1. दिनेश कुमार विश्वकर्माOctober 15, 2019 at 9:17 PM

    Nice poem bose sir

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...