नाम श्री स्वपन बोस
शिर्षक मन
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मोबाइल ९३४०४३३४८२
शिर्षक मन
पता जुगानी केम्प छत्तीसगढ़
मोबाइल ९३४०४३३४८२
मन
मन से जो जीत जाये ।
सच्चा जीवन उसका हो जाता है ।
दुःख दूर हो जाता उसका ,वह अपने आप को पा लेता है ।
सच्चा जीवन उसका हो जाता है ।
दुःख दूर हो जाता उसका ,वह अपने आप को पा लेता है ।
असंख्य विचारों का समुह हमारा मन बनाता है ।
मन ही वह जादूगर है ।
जो कभी हंसाता कभी रूलाता है।
मन ही वह जादूगर है ।
जो कभी हंसाता कभी रूलाता है।
मन ही वह है जो हमें झुठी संसार को भी ,सच जैसा
हमें दिखाता है ।
हमें दिखाता है ।
लगता है यहां सब मेरे अपने है ।
असल आंख खोलकर देखो तो
जगत सपना नज़र आता है ।
असल आंख खोलकर देखो तो
जगत सपना नज़र आता है ।
जनम जनम मानव मन के ,जाल में फंसकर रहता है ,
झुठी माया पाकर बहुत इठलाता है ।
झुठी माया पाकर बहुत इठलाता है ।
दुःख में जब सब अपने साथ छोड़ जाते हैं ,यह मानव , बहुत रोता है ।
मन के मारे सब है यह ,
कोई शराब के नशा में डूबा है ।
कोई शबाब के नशा में डूबा है ।
कोई शराब के नशा में डूबा है ।
कोई शबाब के नशा में डूबा है ।
ख़ुश तो केवल वह होता ,जीसके जीवन में ख़ुदा होता है ।
तोड़ो मन की सोने की बेड़ियों को ,एक उड़ान तो भर दो
अपना लो ईश्वर को जीवन में , झुठी दुःख को विदाई दे दो ,
मानव तूं मन नहीं तुझमें
ईश्वर का अंश है ।
ईश्वर का अंश है ।
पहचान लो अपने ,मन को मारकर ।
तोड़ दो जो जीवन का दंश है ।
तोड़ दो जो जीवन का दंश है ।
मन के हारे हार है ।
मन के जीते जीत है।
येही तो संत जनों का गीत है ।
मन के जीते जीत है।
येही तो संत जनों का गीत है ।

Nice poem bose sir
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