Monday, October 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि देवव्रत कर शर्मा की रचना- मातृभूमि



नाम- देवव्रत कर शर्मा
पता-  सुकमा,छत्तीसगढ़
शीर्षक- "मातृभूमि वन्दना "
मोबाईल- 7587373238
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हे मातृभूमि जय हो तेरी
मेरा अर्पण स्वीकार करो।
नव गति नव लय ताल दे
लावण्य धरा का श्रृंगार करो।।
राम कृष्ण की पावन धरती
इस पर ही बलि जाना है।
अर्जुन भीम शिवाजी जैसे
गुण ऐसा निर्माण करो।।
हे मातृभूमि-----------------।
किरीट हिमालय शोभित तेरा
सागर चरण पखारता ।
हार बनी गंगा की धारा
हरितिमा से श्रृंगार करो ।।
हे मातृभूमि--------------------।
श्वेत धवल कुन्तल तेरा
फुल्य कुसुमित आंचल है।
सुप्त धरा के नवजीवन में
जड़ चेतन को जागृत करो ।।
हे मातृभूमि-------------------।
काम क्रोध मद लोभ मोह
हर मानव से दूर पड़े हों ।
स्वार्थ वासना की आंधी में
मानवता का कल्याण करो ।।
हे मातृभूमि-----------------।
हे मातृभूमि जय हो तेरी
मेरा अर्पण स्वीकार करो।
नव गति नव लय ताल दे
लावण्य धरा का श्रृंगार करो ।।
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देवव्रत कर शर्मा
सुकमा 494111।

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