Monday, October 7, 2019

राजस्थान से बजरंग सैनी की रचना- भीतर का रावण

नाम - बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
राज्य - राजस्थान
संपर्क - 8769764786
शीर्षक - - भीतर का रावण

आओ, आज एक प्रण लें।
भीतर के रावण को मारने का,
पीड़ित सिसकती सीता को तारने का।
क्यों पुतले जलाते हैं उसके,
जो भीतर घर कर बैठा है,
जलाकर आदर्शों की होली,
आसुरी प्रवृत्ति से हेठा है,
भर रहा भाव जो तम का,
सत का कर रहा विनाश है,
मनुजता का प्रबल शत्रु,
संस्कृति का करता नाश है,
माता सम नारी पर डाल कुदृष्टि,
जो सबको रावण बनाने पर तुला है,
हर घर में आज एक पीड़ित सीता है,
तामसी इंसान मर्यादा अपनी भूला है,
पहले राम बनो, मर्यादा को धारण करो,
हर नारी को देकर मान, फिर रावण दहन करो,
"वज्रघन" आओ आज एक प्रण लें।
भीतर के रावण को मारने का,
पीड़ित सिसकती सीता को तारने का।
बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
8769764786

1 comment:

  1. बहुत ही सारगर्भित रचना है

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...