नाम - बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
राज्य - राजस्थान
संपर्क - 8769764786
शीर्षक - - भीतर का रावण
आओ, आज एक प्रण लें।
भीतर के रावण को मारने का,
पीड़ित सिसकती सीता को तारने का।
क्यों पुतले जलाते हैं उसके,
जो भीतर घर कर बैठा है,
जलाकर आदर्शों की होली,
आसुरी प्रवृत्ति से हेठा है,
भर रहा भाव जो तम का,
सत का कर रहा विनाश है,
मनुजता का प्रबल शत्रु,
संस्कृति का करता नाश है,
माता सम नारी पर डाल कुदृष्टि,
जो सबको रावण बनाने पर तुला है,
हर घर में आज एक पीड़ित सीता है,
तामसी इंसान मर्यादा अपनी भूला है,
पहले राम बनो, मर्यादा को धारण करो,
हर नारी को देकर मान, फिर रावण दहन करो,
"वज्रघन" आओ आज एक प्रण लें।
भीतर के रावण को मारने का,
पीड़ित सिसकती सीता को तारने का।
बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
8769764786
बहुत ही सारगर्भित रचना है
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