Monday, October 7, 2019

मध्यप्रदेश से कवि धनंजय सिते(राही) की रचना- दशहरा

कनि-धनंजय सिते(राही)
जिला-छिन्दवाड़ा(म.प्र.)
सम्पर्क-9893415829
शीर्षक-दशहरा(दश-हर)
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              !! दशहरा !!
दशहरा शब्द दश-हर से बना है
अर्थ,दस बुराइयो से मुक्त होना है!
पाओ बुराइयो से छूटकारा तमाम
बच्चे बुढे सब बन जाओ राम!!
                       २
सबको धर्म की प्रित होती है
सदा सत्य की जित होती है!
सत्य  धर्म  है  चारो  धाम
अपनाओ  बन  जाओ  राम!!
                      ३
ब्रंम्हा  से  वरदान  था  पाया
महिषासुर हाहाकार मचाया!
दुर्गा ने किया था काम तमाम
आई ब्रम्हा,विष्णु,शिव शक्ती काम
                       ४
देवी  के  नौ  रुप  को  ध्याया
मां दुर्गा से शक्ती,आशिष पाया!
रावण को पहूंचाया वैकूंठ धाम
जय  मर्यादा  पुरुषोत्तम  राम!!
                    ५
सब  मानव से  इंसा बन जाओ
और सत्य अहिंसा को अपमाओ!
श्री महाविर जी का लेकर  नाम
अब  घर-घर मे  उपजाओ राम!!
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कवि-धनंजय सिते(राही)
सम्पर्क-9893415829
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