कवि श्री स्वपन बोस
राज्य छत्तीसगढ़
विधा कविता
शिर्षक दुर्गा
मोबाइल ९३४०४३३४८१
पता जुगानी कैंप छत्तीसगढ़
कविता दुर्गा
मां दर्गा दुर्गति नाशनि होती है ।
दुर करने मानव की सारी समस्या ,शरद ऋतु में आती है ।
मानव मन में बसी ,नव शक्ति का स्वरुप है दुर्गा ।
सुख धाति दुःख हरण करने वालीं ,दुर्गा शक्ति को
हर नारी में जगाना होगा ।
समाज में फैली नारी हर पीड़ा को ,दुर्गा शक्ति से मिटाना होगा ।।
दुर्गा नव दिन के लिए आकर चलें जाती है ,
पर हर नारी को अपने अंदर की दुर्गा शक्ति को जगाये रखना होगा ।
जब दुर्गा पूजा आती है ।
चारों दिशाओं में , अध्यात्मिक लहर छा जाती है ।।
जीवन्त हो उठती है फिजा भी , खेतों में कास वन के फुल खिल जाती है ।
मंद मंद शित भी शारदीय पर्व में खो जाती है
भक्ति मय होती है मां दुर्गा का पर्व , आनन्द में जीवन
खो जाती है ।।
मंदिरों में भक्त
जन ढाक ढोल बजाते हैं ।
खुश करने मां दुर्गा को
नव बाल कन्या भोज कराते हैं ।।
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