Friday, October 4, 2019

महाराष्ट्र से कवयित्री राखी टी सिंह की रचना- तुझ बिन माँ अकेला सा लगे

१. कवि- श्रीमती राखी टी सिंह
२. राज्य-  मुंबई महाराष्ट्र
3.विधा - कविता
4.रचना -💐तुझ बिन माँ अकेला सा लगे.
माँ तेरा मेरा जन्म का नाता,
मैंने जीते जी ना समझा l
पापा से  मेरा था अपना नाता,
मैं ना तुझे को कुछ कभी समझा  ll

अम्मा बेटे को जब मैंने जन्मा,
तब माँ तेरे भाव को मैंने समझा l
तब मुझ बेटी में तेरी  ममता जन्मी,
मैंने तेरा मातृभाव तबजाकर  समझा ll

तेरी डांटा  झिडकन  गुस्सा,
तब अच्छा, प्यारा प्यारा लागा l
तब खुद पर जो आया गुस्सा,
मैं क्यूँ तुझे कभी पहले गले ना लागा ll

आज अब तू नही है संग में,
तब तेरी चाह जागे है मन में l
जीवन भर तेरी खटनी अंग से,
मैं क्यूँ ना  मना कर पायी मन से ll

तुझे शायद वँहा पर ज्यादा,
यहाँ से सुख दिखा होगा माता l
वहां पर खुश तू हों ज्यादा,
यही सोच संतोष करूँ  माता ll

जीवन के सारे नाते है अभी यहां,
पर तुझे बिन सब अब पराये से लगे l
जीवन तो तुझ बिन सुना सुना है  यहाँ,
भारी बाजार में मुझे  कैलाशीको   माँ अकेला सा लगे ll
भारी बाजार में मुझ कैलाशी को माँ अकेला सा लगे. ll

राखी टी सिंह  मुंबई महाराष्ट्र
03/10/2019

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