नाम--- डीसी त्रिपाठी
राज्य-- छत्तीसगढ़
विधा -- कविता
शीर्षक--- #सगाई
संपर्क--9893900105
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#सगाई ।
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शाम को ढोलक की थाप पर,
गा रही थी लड़कियां ।।
चहचहाती बागबाँ की ,
मुश्कराती लड़कियां ।।
नव सृजन का भार थाम्हें ,
साहसी हैं लड़कियां ।।
प्रकृति की अनमोल रचना,
दी हमें भगवान ने ,
आसमां से चाँद सा जब,
जगमगाई लड़कियां ।।
दिल के टुकड़े को हमेशा ,
सीने से लगा रखा #दिवाकर,
धरा का कण कण सुवासित ,
कर दिखाई लड़कियां ।।
वक़्त के हर दौर से ,
आगे निकलकर ,
कब हो गई खुद से
पराई लड़कियां ।।
दे रहे आशीष उनको ,
खुशियों से दामन भरा हों ,
खिलखिलाती चहकती रहें ,
गूंजती आवाज़ से पावन धरा हो ।
डीसी त्रिपाठी
रायपुर -छत्तीसगढ़ ।

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