Wednesday, October 30, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि डीसी त्रिपाठी की रचना- सगाई


नाम--- डीसी त्रिपाठी
राज्य--  छत्तीसगढ़
विधा -- कविता
शीर्षक--- #सगाई
संपर्क--9893900105
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#सगाई ।
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   शाम को ढोलक की थाप पर,
     गा रही थी लड़कियां ।।

   चहचहाती बागबाँ की ,
       मुश्कराती लड़कियां ।।

नव सृजन का भार थाम्हें ,
साहसी हैं लड़कियां ।।

प्रकृति की अनमोल रचना,
   दी हमें भगवान ने ,
      आसमां से चाँद सा जब,
          जगमगाई लड़कियां ।।

दिल के टुकड़े को हमेशा ,
   सीने से लगा रखा #दिवाकर,
     धरा का कण कण सुवासित ,
       कर दिखाई लड़कियां ।।

वक़्त के हर दौर से ,
    आगे निकलकर ,
       कब हो गई खुद से
          पराई लड़कियां ।।

दे रहे आशीष उनको ,
    खुशियों से दामन भरा हों ,
        खिलखिलाती चहकती रहें ,
        गूंजती आवाज़ से पावन धरा हो ।


डीसी त्रिपाठी
रायपुर -छत्तीसगढ़ ।

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