नाम - डॉ पूनम झा
शीर्षक - कोशिश
राज्य - दरभंगा,बिहार
सम्पर्क -
कोशिश
★★★★★★★★★★★★
एक दिन सोच रही थी
ज़िन्दगी को क्या और कैसे
बनाया जाए।
ज़िन्दगी यूँ ही वीरान हैं,
इसको खुश कैसे किया जाए।
तभी मन ने कहा,
कितना भी कर लो,
उम्मीदों की ज़ंजीर से ना
बचा पाओगे ।
क्योंकि ये ज़िन्दगी
एक जुआ है प्यारे
इसके साथ दोस्ती
करके ही जा पाओगे।
वरना हर वक्त हार से
हाथ मिलाओगे ।
यह सुनते -ही दिमाग
सटपटा गया ।
खट से मन की खिड़की को
खटखटा दिया ।
बोला, माना कि ज़िन्दगी वीरान है,
पर, तू क्यों इतना हैरान है,
क्योंकि हर कोशिश करने वाले को
सफलता नहीं मिलती ।
पर,यह भी सच है दोस्तों,
कि कोशिश के बिना
ज़िन्दगी नहीं मिलती ।
डॉ पूनम झा
दरभंगा,बिहार
दिनांक-30/10/19
शीर्षक - कोशिश
राज्य - दरभंगा,बिहार
सम्पर्क -
कोशिश
★★★★★★★★★★★★
एक दिन सोच रही थी
ज़िन्दगी को क्या और कैसे
बनाया जाए।
ज़िन्दगी यूँ ही वीरान हैं,
इसको खुश कैसे किया जाए।
तभी मन ने कहा,
कितना भी कर लो,
उम्मीदों की ज़ंजीर से ना
बचा पाओगे ।
क्योंकि ये ज़िन्दगी
एक जुआ है प्यारे
इसके साथ दोस्ती
करके ही जा पाओगे।
वरना हर वक्त हार से
हाथ मिलाओगे ।
यह सुनते -ही दिमाग
सटपटा गया ।
खट से मन की खिड़की को
खटखटा दिया ।
बोला, माना कि ज़िन्दगी वीरान है,
पर, तू क्यों इतना हैरान है,
क्योंकि हर कोशिश करने वाले को
सफलता नहीं मिलती ।
पर,यह भी सच है दोस्तों,
कि कोशिश के बिना
ज़िन्दगी नहीं मिलती ।
डॉ पूनम झा
दरभंगा,बिहार
दिनांक-30/10/19

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