नाम - सुभाष सैनी "सृजन"
राज्य - राजस्थान
विधा - कविता
शीर्षक - भाई दूज
सम्पर्क सूत्र -
राज्य - राजस्थान
विधा - कविता
शीर्षक - भाई दूज
सम्पर्क सूत्र -
.............भाई दूज............
नवल प्रभात की नूतन किरणें ,
जल थल में बिखर रही है।
चंदन अक्षत थाल सजाकर ,
बहना भाई को निरख रही है।।
लड़ना झगड़ना और रूठना
बालमन के खेल निराले थे।
ना हो कभी दुख इक दूजे को
यह स्वप्न मन में पाले थे
बचपन की यादों से पुरित ,
यह भाई दूज की बेला है ।
रक्षा के अनमोल वचन व
नेह निबंध का मेला है ।।
स्मित वदन भ्राता के भाल पे,
तिलकार्चन कर यो विस्मित हुई।
जैसे जीण हर्ष को देखकर ,
प्रेमाभाव पुलकित हुई।।
स्वर्ग- सा निर्मल गंगा- सा पावन
आज का प्रभात है ।
भाई बहन का पुण्य नेह तो,
"सृजन" नियंता की सौगात है ।।
जल थल में बिखर रही है।
चंदन अक्षत थाल सजाकर ,
बहना भाई को निरख रही है।।
लड़ना झगड़ना और रूठना
बालमन के खेल निराले थे।
ना हो कभी दुख इक दूजे को
यह स्वप्न मन में पाले थे
बचपन की यादों से पुरित ,
यह भाई दूज की बेला है ।
रक्षा के अनमोल वचन व
नेह निबंध का मेला है ।।
स्मित वदन भ्राता के भाल पे,
तिलकार्चन कर यो विस्मित हुई।
जैसे जीण हर्ष को देखकर ,
प्रेमाभाव पुलकित हुई।।
स्वर्ग- सा निर्मल गंगा- सा पावन
आज का प्रभात है ।
भाई बहन का पुण्य नेह तो,
"सृजन" नियंता की सौगात है ।।

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