नाम कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
विधा ग़ज़ल
जम्मू कश्मीर
विधा ग़ज़ल
मुझको मेरे हाल पर तुम छोड़ दो
ज़िन्दगी की ताल पर तुम छोड़ दो
ज़िन्दगी की ताल पर तुम छोड़ दो
कितने किस्सों में बिकेंगे हम अभी
आने वाले साल पर तुम छोड़ दो
आने वाले साल पर तुम छोड़ दो
कब तलक ये घोंसला बच पाएगा
टूटते से डाल पर तुम छोड़ दो
टूटते से डाल पर तुम छोड़ दो
जंग ये चलती रहेगी कब तलक
लश्करों की ढाल पर तुम छोड़ दो
लश्करों की ढाल पर तुम छोड़ दो
इन चराग़ों को हवाओं की ज़रा
बेरहम सी चाल पर तुम छोड़ दो
बेरहम सी चाल पर तुम छोड़ दो
होगी बेपर्दा सियासत भी कभी
अधबुने इस जाल पर तुम छोड़ दो
अधबुने इस जाल पर तुम छोड़ दो
कैद था पलकों की हद में अश्क जो
अब के इसको गाल पर तुम छोड़ दो।
अब के इसको गाल पर तुम छोड़ दो।
कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
जम्मू कश्मीर

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