जय श्री तिवारी
राज्य -मध्य प्रदेश
मोबाइल-
शीर्षक- दीप
राज्य -मध्य प्रदेश
मोबाइल-
शीर्षक- दीप
एक दीप जलाया था मन में कहीं धीरज और विश्वास का
ईश्वर में दृढ़ आस्था का
उसमें तेल और घी डालती रही
संतोष और संयम का
उसकी लो पर ध्यान लगाती रही
उसे देखती रही कि किसी भी हाल में वह दीप बुझने ना पाए
लेकिन कभी-कभी लगता है
दीप की लो कम होने लगी है
उसमें संदेह और अविश्वास का तेल बढ़ता जा रहा है
यह क्या ? जिस उद्देश्य को लेकर चली थी मैं
क्यों उसमें मिलावट हो गई?
क्यों उस पर नकली परत चढ़ गई?
मन में फिर से एक दीप जलाया है
दृढ़ विश्वास की लौ जलाई है
जिसे फिर नहीं बुझने दूंगी
अभी तो मुझे बहुत से निराश एवं अंधेरी जिंदगी में खुशी का दीप जलाना है
हां! मुझे बहुत आगे जाना है
ईश्वर में दृढ़ आस्था का
उसमें तेल और घी डालती रही
संतोष और संयम का
उसकी लो पर ध्यान लगाती रही
उसे देखती रही कि किसी भी हाल में वह दीप बुझने ना पाए
लेकिन कभी-कभी लगता है
दीप की लो कम होने लगी है
उसमें संदेह और अविश्वास का तेल बढ़ता जा रहा है
यह क्या ? जिस उद्देश्य को लेकर चली थी मैं
क्यों उसमें मिलावट हो गई?
क्यों उस पर नकली परत चढ़ गई?
मन में फिर से एक दीप जलाया है
दृढ़ विश्वास की लौ जलाई है
जिसे फिर नहीं बुझने दूंगी
अभी तो मुझे बहुत से निराश एवं अंधेरी जिंदगी में खुशी का दीप जलाना है
हां! मुझे बहुत आगे जाना है
जय श्री तिवारी खंडवा

Pukhraj sir thanks apki sahitya sadhana ko naman🙏🙏
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