कवयित्री - रश्मि अग्निहोत्री
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- मेरा जी चाहता है !
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राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- मेरा जी चाहता है !
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आज फिर अलहड़ बसंती सी
लहराने को जी चाहता है ।
अबोध सी होकर माँ!
गोद में समा जाने को
मेरा जी चाहता है ।
निश्छल आँखों में
दुनियाभर से दूर
आओं पापा मेरे
आपकी मजबूत ऊंगली थामें
बचपन की गलियों में
आज फिर खो जाने को
मेरा जी चाहता हैं।
कागज़ की कश्ती पर
सपनों की बस्ती पर
आज फिर इतराने को
मेरा जी चाहता है।
चाँद को चोटी में
सज़ा लेने को ,
और चीथड़ों की गुड़िया
बनकर दोनों जहाँ
आज फिर पा लेने को
मेरा जी चाहता है।
फरेब और मतलब की
जवाबदारी छोड़ ''रश्मि ''
अलहड़ मस्तानी बसंती
बन उड़ जाने को
आज फिर मेरा
जी चाहता है ।।
लहराने को जी चाहता है ।
अबोध सी होकर माँ!
गोद में समा जाने को
मेरा जी चाहता है ।
निश्छल आँखों में
दुनियाभर से दूर
आओं पापा मेरे
आपकी मजबूत ऊंगली थामें
बचपन की गलियों में
आज फिर खो जाने को
मेरा जी चाहता हैं।
कागज़ की कश्ती पर
सपनों की बस्ती पर
आज फिर इतराने को
मेरा जी चाहता है।
चाँद को चोटी में
सज़ा लेने को ,
और चीथड़ों की गुड़िया
बनकर दोनों जहाँ
आज फिर पा लेने को
मेरा जी चाहता है।
फरेब और मतलब की
जवाबदारी छोड़ ''रश्मि ''
अलहड़ मस्तानी बसंती
बन उड़ जाने को
आज फिर मेरा
जी चाहता है ।।
#रश्मि अग्निहोत्री
केशकाल, जिला कोंडागांव
केशकाल, जिला कोंडागांव

बेहतरीन रचना मैडम बहुत बहुत बधाई
ReplyDeleteशानदार रचना जीजी आभार आपका मंचन के लिए
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