Monday, October 7, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि स्वपन बोस की रचना- विदाई

कवि- स्वपन बोस
शिर्षक  विदाई
राज्य छत्तीसगढ़
मोबाइल ९३४०४३३४८१
पता जुगानी कैंप छत्तीसगढ़

कविता   विदाई

बहुत जी लिए इस दुनिया
में ,अब तो विदाई की बेला है ।

             जो साथ थे , रिश्ते नाते ,संगी साथी
सबको छोड़ अकेला ही
चलना है ।

        ‌ ‌‌सज रही है बांस की
          डोली मेरे लिए बहुत जी लिए ,अब एक सपना छोड़ ,नये सपनों की
दुनिया में जाना है ।

             विदाई की बेला अलबेला होता है ,
जगत मिथ्या है ,आना और
जाना ही सच्चा होता है ।

       ‌बहुत देख लिया सपना , चलों अपना घर
इस मतलबी दुनिया में कोई
नहीं अपना हो पाता है ।

        विदाई  की पावन बेला ही
        सत्य है ,अब कहां तुम्हारे स्वजन सब छोड़ कर जाना पड़ेगा ।
पाप की गठरी  भी भारी बहुत  है
है बोझ इसका भी  उठाना
पड़ेगा ।

             ‌मन नहीं करता
              सुन्दर सपनों की दुनिया छोड़कर जाने को ,बीजा खत्म हो जाये
तो देश पराया छोड़  स्वदेश जाना ही पड़ेगा ।

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