कवि- स्वपन बोस
शिर्षक विदाई
राज्य छत्तीसगढ़
मोबाइल ९३४०४३३४८१
पता जुगानी कैंप छत्तीसगढ़
कविता विदाई
बहुत जी लिए इस दुनिया
में ,अब तो विदाई की बेला है ।
जो साथ थे , रिश्ते नाते ,संगी साथी
सबको छोड़ अकेला ही
चलना है ।
सज रही है बांस की
डोली मेरे लिए बहुत जी लिए ,अब एक सपना छोड़ ,नये सपनों की
दुनिया में जाना है ।
विदाई की बेला अलबेला होता है ,
जगत मिथ्या है ,आना और
जाना ही सच्चा होता है ।
बहुत देख लिया सपना , चलों अपना घर
इस मतलबी दुनिया में कोई
नहीं अपना हो पाता है ।
विदाई की पावन बेला ही
सत्य है ,अब कहां तुम्हारे स्वजन सब छोड़ कर जाना पड़ेगा ।
पाप की गठरी भी भारी बहुत है
है बोझ इसका भी उठाना
पड़ेगा ।
मन नहीं करता
सुन्दर सपनों की दुनिया छोड़कर जाने को ,बीजा खत्म हो जाये
तो देश पराया छोड़ स्वदेश जाना ही पड़ेगा ।
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