नाम-श्रीमती शशिकला कठोलिया
शीर्षक- भ्रूण हत्या
राज्य- छत्तीसगढ़
मो.
*भ्रूण हत्या*
बंद करो ये भ्रूण हत्या,
समझाओ सारे जमाने को,
एक भी बेटी नही बचेगी,
मानव तुझे ब्याहाने को।
बेटी करती पुकार यही,
माँ तुम मुझे ना मारना,
मै तो हूँ शोभा तेरे ,
घर परिवार और अँगना,
मरती रही कोख में हर बेटी,
जाओगे कहा बहू लाने को,
एक भी बेटी नही बचेगी ,
मानव तुझे ब्याहने को।
बेटिया तो हर घर को ,
सजाती है संवारती ,
पर दुनिया वाले हरदम ,
उसको ही धिक्कारती,
बन्द करो ये सौदे बाजी ,
करो बन्द इसे जलाने को,
एक भी बेटी नही बचेगी,
मानव तुझे ब्याहने को।
बेटी ये कोख से बोल रही ,
माँ करदे मुझपे उपकार ,
मत मार मुझको जीवन दे ,
देखन दे मुझको भी संसार ,
बिन नारी प्रीत अधूरी है,
आती अस्तित्व बचाने को,
एक भी बेटी नही बचेगी ,
मानव तुझे ब्याहने को।
मत मारो इसे कोख में ,
दे दो इसको जीवन दान,
नारी बिना सुना है दुनिया ,
नारी ही तुम्हारी है पहचान ,
बेटी ही बहन,बेटी ही दुल्हन,
बेटी ही चलाती घराने को,
एक भी बेटी नही बचेगी ,
मानव तुझे ब्याहने को।
श्रीमती शशिकला कठोलिया
बहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteBest
ReplyDeleteNice mam
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteअर्थ इसके गागर में सागर है। बहुत सुंदर और विचारणीय पंक्तिया है
ReplyDeletenice
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteबहुत खूब....👌👌
ReplyDeleteबहुत सुन्दर
ReplyDeleteSuperb
ReplyDeletebahut bahut sunder
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