कवयित्री- कंचन प्रभा
राज्य-दरभंगा ,बिहार
शीर्षक-मुस्कुराने दो
सम्पर्क-7903092818
राज्य-दरभंगा ,बिहार
शीर्षक-मुस्कुराने दो
सम्पर्क-7903092818
*मुस्कुराने दो*
बेटियों को मुस्कुराने दो।
ज्ञान का दीपक जलाने दो।
जन्म से पहले ना मारो
धरती पर उन्हे आने दो।
माँ की गोद में समाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
ज्ञान का दीपक जलाने दो।
जन्म से पहले ना मारो
धरती पर उन्हे आने दो।
माँ की गोद में समाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
कलियों को ना मुरझाने दो।
भवरों को गुनगुनाने दो।
लाल पीले फूल खिलाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
भवरों को गुनगुनाने दो।
लाल पीले फूल खिलाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
पिंजड़े में कैद ना करो
चिड़ियों को चहचहाने दो।
गीत आजादी के गाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
चिड़ियों को चहचहाने दो।
गीत आजादी के गाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
काम का बोझ ना डालो
मिट्टी के खिलौनें बनाने दो।
होठों को खिलखिलाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
मिट्टी के खिलौनें बनाने दो।
होठों को खिलखिलाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
पंख ना काटो फड़फड़ाने दो।
सपने हजार सजाने दो।
यादों का घड़ौन्दा बनाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
ज्ञान का दीपक जलाने दो।
सपने हजार सजाने दो।
यादों का घड़ौन्दा बनाने दो।
बेटियों को मुस्कुराने दो।
ज्ञान का दीपक जलाने दो।
*कंचन प्रभा*
*दरभंगा, बिहार*
*दरभंगा, बिहार*

सामयिक
ReplyDeleteNice poet
ReplyDeleteVery nice 😊
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteWowww..... Nice lines
ReplyDeleteBhut khub
ReplyDeleteBilkul sahi
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