Monday, October 21, 2019

राजस्थान से कवि कुमार तनसुख की रचना- अली के घर अब मने दिवाली


कुमार तनसुख
श्रीमाधोपुर, राजस्थान
सम्पर्क 9351212400
शीर्षक:- अली के घर अब मने दिवाली


मिट जाए तम मन मलिन का
तन उजास मुख पर हो लाली  ।
ईद मुबारक कहे राम अब
अली के घर अब मने दिवाली  ।
हो अजान गिरजा आलय से
मस्जिद में गूंजे भजन पे ताली  ।
चर्च में गाएँ हम गुरूवाणी
गुरूद्वारे मे बजे कव्वाली  ।।
राम हो सबके मन मन्दिर में
सौहार्द रहे हर गली गली  ।
इक दूजे से सजदा कर ले
बने परस्पर सभी सवाली  ।।
               ✍✍ कुमार तनसुख

28 comments:

  1. भाईचारे और सद्भाव का संदेश

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  2. बेहद ख़ूबसूरत लिखा है

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  3. Nice thought Bhai sahb🙏🙏🏽🙏🙏🙏

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  4. शानदार मर्मस्पर्शी

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  5. आज के समय के अनुरूप शानदार कविता

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  6. Nice line तनसुख सर

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  7. बहुत ही सुंदर रचना

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  8. ������������������

    मन्दिर, मस्जिद, चर्च के फसाद में फँसकर रह गया।
    इंसान बनकर आया था, धर्म बनकर रह गया।।

    जहाँ लोग धर्म के नाम पर मर-मिटने को तैयार हो जाते हैं। एक-दूसरे के धर्म को श्रेष्ठ बताते हुए अन्य धर्म की आलोचना करते हैं। वहीं आपने जो एक धर्म से परे हटकर सभी धर्मों को समान समझकर निःस्वार्थ भाव से यह कविता लिखी है यह वाकई सराहनीय है।

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  9. अतिसुन्दर भाई जी

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  10. अतिसुन्दर भाई जी

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  11. बहुत सुंदर। कवि तनसुख की कविताएं सार्थक एवम् सशक्त सामाजिक संदेश है। शुभकामनाएं

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