कुमार तनसुख
श्रीमाधोपुर, राजस्थान
सम्पर्क 9351212400
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शीर्षक:- अली के घर अब मने दिवाली
मिट जाए तम मन मलिन का
तन उजास मुख पर हो लाली ।
ईद मुबारक कहे राम अब
अली के घर अब मने दिवाली ।
तन उजास मुख पर हो लाली ।
ईद मुबारक कहे राम अब
अली के घर अब मने दिवाली ।
हो अजान गिरजा आलय से
मस्जिद में गूंजे भजन पे ताली ।
चर्च में गाएँ हम गुरूवाणी
गुरूद्वारे मे बजे कव्वाली ।।
मस्जिद में गूंजे भजन पे ताली ।
चर्च में गाएँ हम गुरूवाणी
गुरूद्वारे मे बजे कव्वाली ।।
राम हो सबके मन मन्दिर में
सौहार्द रहे हर गली गली ।
इक दूजे से सजदा कर ले
बने परस्पर सभी सवाली ।।
✍✍ कुमार तनसुख
सौहार्द रहे हर गली गली ।
इक दूजे से सजदा कर ले
बने परस्पर सभी सवाली ।।
✍✍ कुमार तनसुख

Nice rchna bhai ji
ReplyDeleteSuperb
ReplyDeleteAnekta me ekta
ReplyDeleteभाईचारे और सद्भाव का संदेश
ReplyDeletevery nice msg bhai ji. ..
ReplyDeleteबेहद ख़ूबसूरत लिखा है
ReplyDeleteNice thought Bhai sahb🙏🙏🏽🙏🙏🙏
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteअतिसुन्दर
ReplyDeleteशानदार रचना
ReplyDeleteशानदार मर्मस्पर्शी
ReplyDeleteआज के समय के अनुरूप शानदार कविता
ReplyDeleteGajab👌🙏
ReplyDeleteNice line तनसुख सर
ReplyDeleteBhot hi badhiya
ReplyDeleteNice
ReplyDelete👌👌✌️✌️👍👍👍
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर रचना
ReplyDeleteBest bhaig
ReplyDelete������������������
ReplyDeleteमन्दिर, मस्जिद, चर्च के फसाद में फँसकर रह गया।
इंसान बनकर आया था, धर्म बनकर रह गया।।
जहाँ लोग धर्म के नाम पर मर-मिटने को तैयार हो जाते हैं। एक-दूसरे के धर्म को श्रेष्ठ बताते हुए अन्य धर्म की आलोचना करते हैं। वहीं आपने जो एक धर्म से परे हटकर सभी धर्मों को समान समझकर निःस्वार्थ भाव से यह कविता लिखी है यह वाकई सराहनीय है।
अतिसुन्दर भाई जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteअतिसुन्दर भाई जी
ReplyDeleteधन्यवाद भाई
DeleteBahot sundar
ReplyDeleteशुक्रिया
Deleteबहुत सुंदर। कवि तनसुख की कविताएं सार्थक एवम् सशक्त सामाजिक संदेश है। शुभकामनाएं
ReplyDeleteDiwali special
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