Monday, October 21, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि गजेंद्र द्विवेदी गिरीशकी रचना- चलता है


रचनाकार - गजेंद्र द्विवेदी गिरीश
राज्य - छत्तीसगढ़ (भिलाई 3)
संपर्क - 7000858588
शीर्षक - चलता है।।

मुकद्दर का लिखा किसे पता चलता है।
घर हमारा हमारे हाथों से ही पलता है।।
मुंह छिपाकर हमको ही मिलेगा अँधेरा,
सूरज तय समय पर उगता ढलता है।।
हमने तो चाहा था संग वो भी हो मगर,
अब नहीं रही फिकर कि क्यूँ जलता है।।
करलो बातें बेअदबी से चाहे तुम जितनी,
भरोसे की गर्मी से ही नफरत गलता है।।
सोचता है जो कि मैं ही सिकंदर हूँ यहाँ,
दौलत के ढेर में भी वही हाथ मलता है।।
करते रहें कोशिशें हरदम इमानदारी से,
फले देर से ही सही पर खूब फलता है।।
बढ़ चलेंगे गिरीश थाम अपनों के हाथ,
दूर हो मंजिल भले फिर नहीं खलता है।।
गिरीश

6 comments:

  1. हृदय स्पंदित करती भावाभिव्यक्ति भैया..हमेशा की तरह लाजवाब

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  2. अप्रतिम रचना भईया लाजवाब
    दिल मे उतर गई सीधे भईया
    आप का क्या कहना ।।।

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