नाम-कुन्दन पाटिल
शीर्षक- मेरी रचना भी नाम कमायेगी
राज्य-मध्य प्रदेश(देवास)
मेरी रचना भी नाम कमायेगी
प्यास लगी लिखने की जब
बैठ गये हम लिखने को तब।
लिख न पायें हम विशेष कुछ
बहुत सोचा इधर-उधर का तब।
अपने पराये का ताना बाना भी
निकल न पाया कोई तथ्य।
पड़ोसियों दोस्तों का सहारा लिया
निकल न पाया कोई तब भी रस।
सुख दुख का घोल बनाकर
हमने बनाया कुछ नया तब।
रचना रचने का यह प्रयास
चलता रहा सत्त युही तब।
दिन महिने साल दर साल
चलता रहा प्रयास निरंतर।
दिल को छुती लब पर गुनगुनाती
रचना को मैं रच न पाया था।
कलम को ख्याती दिलाने को
लिखता रहा रचता रचना संसार।
फिर भी लिखने की प्यास न भुझी
बढ़ती ही यह तो जा रही।
इसी प्यास बुझाने को मैं भी
लिखता ही मैं जा रहा हुँ।
आखिर कभी तो मेरी कलम भी
अपना सुन्हरा रंग जमायेगी।
कुन्दन पाटिल देवास
बैठ गये हम लिखने को तब।
लिख न पायें हम विशेष कुछ
बहुत सोचा इधर-उधर का तब।
अपने पराये का ताना बाना भी
निकल न पाया कोई तथ्य।
पड़ोसियों दोस्तों का सहारा लिया
निकल न पाया कोई तब भी रस।
सुख दुख का घोल बनाकर
हमने बनाया कुछ नया तब।
रचना रचने का यह प्रयास
चलता रहा सत्त युही तब।
दिन महिने साल दर साल
चलता रहा प्रयास निरंतर।
दिल को छुती लब पर गुनगुनाती
रचना को मैं रच न पाया था।
कलम को ख्याती दिलाने को
लिखता रहा रचता रचना संसार।
फिर भी लिखने की प्यास न भुझी
बढ़ती ही यह तो जा रही।
इसी प्यास बुझाने को मैं भी
लिखता ही मैं जा रहा हुँ।
आखिर कभी तो मेरी कलम भी
अपना सुन्हरा रंग जमायेगी।
कुन्दन पाटिल देवास

Nice dad
ReplyDeleteIt's a very nice poem
ReplyDeletePapa you are the best
ReplyDeleteबहूत खुब जिजाजी !!
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