कवियित्री -नलिनी बाजपेयी
राज्य -छत्तीसगढ़
शीर्षक -परछाई
मो.नम्बर-
राज्य -छत्तीसगढ़
शीर्षक -परछाई
मो.नम्बर-
परछाई
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तुम असमय चले गए क्यों?
तुम तो थे मेरे जीवन की
परछाई।
तुम तो थे मेरे जीवन की
परछाई।
तुम्हें बिदा देने देखो बेटा,
भर आईं आज मेरी
अंगनाई।
भर आईं आज मेरी
अंगनाई।
जाना था तो जन्म लिया क्यों?
आँचल तुमने क्यों मेरी
सजाई?
आँचल तुमने क्यों मेरी
सजाई?
"मलय"तुम्हारा नाम रखी थी,
करो सुवासित ईश्वर की
अजिराई।
करो सुवासित ईश्वर की
अजिराई।
जरा भी मेरा ख्याल नहीं क्यों?
ईश्वर ने क्यों छीनी आज मेरी
परछाई?
ईश्वर ने क्यों छीनी आज मेरी
परछाई?
क्रूर विधाता हमसे रूठा क्यों?
सोचा था बनोगे घर की
रोशनाई।
सोचा था बनोगे घर की
रोशनाई।
आशा रूठी,उम्मीद टूटी क्यों,
पढ़-लिख बन बड़े करते
बहना-बिदाई।
पढ़-लिख बन बड़े करते
बहना-बिदाई।
रह-रह कर बातें याद आती क्यों?
भोली सूरत,तुतली बातें
आती रुलाई।
भोली सूरत,तुतली बातें
आती रुलाई।
भूल हुई हमसे कहाँ कैसे क्यों?
पिता की आस की तुम थे
परछाई।
पिता की आस की तुम थे
परछाई।
रंग-बिरंगी दुनियां देखी नहीं क्यों?
उम्र अभी थी तुम्हारी
तरुणाई।
उम्र अभी थी तुम्हारी
तरुणाई।
देखा जो सपना पूरा नहीं क्यों?
नियति क्यों बजा रही दुःख की शहनाई।
नियति क्यों बजा रही दुःख की शहनाई।
विस्तीर्ण ह्रदय आकुल हुआ क्यों?
जाओ सुखी,शांत रहो स्वीकारो ईश्वर-पहुनाई।
जाओ सुखी,शांत रहो स्वीकारो ईश्वर-पहुनाई।
मेरे लिए बचा क्या,जिऊँ
क्यों ?
कभी मिलोगे ना तिमिर में डूबी मेरी परछाई।
क्यों ?
कभी मिलोगे ना तिमिर में डूबी मेरी परछाई।
तुम असमय चले गए क्यों?
तुम तो थे मेरे जीवन की
परछाई।
तुम तो थे मेरे जीवन की
परछाई।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,( छ. ग.)
संबलपुर, कांकेर,( छ. ग.)

बहुत खूब दीदी दिल को छू लेने वाली कविता लिखी है आपने।������
ReplyDelete-Nisha Kaur