Wednesday, October 23, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि नलिनी बाजपेयी जी की रचना- अमावस की रात


दीपावली विशेषांक के लिए
कवियित्री - नलिनी बाजपेयी
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-अमावस की रात
मो.नम्बर-
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    अमावस की रात
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अमावस की अंधेरी रात,
धरती को तारों से
सजा दीजिए।
तारों की जरूरत नहीं आज,
मिट्टी के दीपों को
जला दीजिए।
रो रही बिटिया वतन की,
उड़ रही रंगत चमन की,
नन्हीं परी को एक बार
हंसा दीजिए।
सरहद पर बाजी लगी जान की है,
दिल धड़क रहा मां बेटी,पत्नी बूढ़े बाप का
शहादत पर अमरता का दीप
जला दीजिए।
जाति, धर्म की आंधी से
हिलने लगी दीवार वतन की,
खण्डित हो रही मानवता धरा की
भाई-भाई को फिर से
मिला दीजिए।
प्रगति पथ पर बढ़ते दिखे नौजवां देश के,
स्वार्थ,हिंसा मिटा हमनवां बने देश के
प्रगति और उन्नति का दीप
जला दीजिए।
     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर (छ. ग.)

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