अपर्णा शर्मा "शिव संगीनी"
राज्य: गुजरात
विधा : कविता
शीर्षक : *श्राद्ध *
कल भैया ने माँ का श्राद्ध किया
दूर दूर से बुलाएं पंडित उनका खूब सम्मान किया
हवन दान दक्षिणा भंडारा कर
अपनी मातृ भक्ति का गुणगान किया भर दी
उन्होंने पडिंतो की झोली
हर बात पूरी की जो उनहोंने बोलीं
फिर बोले पंडित जी देना
ऐसा आशीर्वाद
धन दौलत से धर भर जाए
हो जाए बिजनेस आबाद
सुन यह बात मैं सोच में पड़ गई
आँखे मेरी आंसुओ से भर गई
क्यो है इतनी धन दौलत की चाह
इसके कारण व्यापत धर में डाह
क्यो नहीं माँगी धर की सुख शांति
जिस से वो वंचित था
खो गई थी
चेहरे की कांति
अचानक बिजली सी कौंधी
कैसे मिल जाएगा उसको सुख
जब उसने हीं पहुंचाया अपनी जन्म दायिनी को दुख
धर के पिछवाड़े में रहतीं
हर दुख चुपचाप सहती
भूख प्यास से व्याकुल माँ ने
अंतिम स्वास भरीं यह भी उसे ज्ञात नहीं
अपर्णा शर्मा
"शिव संगीनी"
गुजरात
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