नाम----कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
9419989448
विधा---ग़ज़ल
इक उम्र हमने नाम लिखी इंतज़ार के
यह ज़िन्दगी युंही चले हैं अब गुज़ार के
इस बेरुख़ी का हमको सबब तुम न पूछना
तुम भी तो खो गए कहीं हमको पुकार के
अब तो खिजाँ से भी हमें लगता नहीं है डर
दामन में बांध लाए हैं मौसम बहार के
उगने लगेंगे जल्द ही उल्फ़त के दश्त भी
बोए हैं हमने इस दफ़ा मौसम जो प्यार के
अपनी महोबतों पे हमें है यकीं सनम
आएंगे लौट कर वही दिन एतबार के
कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
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