Tuesday, October 22, 2019

महाराष्ट्र से कवि संजय वासनिक जी की रचना- गुमान



कवि:- संजय वासनिक
शीर्षक:-गुमान
पता:- चेंबुर , मुंबई, महाराष्ट्र
भ्रमणध्वणी :- ९८६९०८१४८४.
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गुमान
जानता हुं मै
​ज़िन्दगी कभी भी
ले सकती है करवट,
ईसिलीये किसी बात का
गुमान नही करता ..
​गर छुलु मै बुलंदियाँ हज़ार,
मगर किसीके लीये कोई
गुनाह नही कर सकता
कोई और करे गुनाह तो
उसे सह नही सकता
ईसिलीये मै किसी बात
का गुमान नही करता
कुछ बेतुके झगड़े​,
​कुछ इस तरहसे ,
खत्म कर दे​ना चाहता हुं,
हमेशा हमेशा के लीये..
​जहाँ गलती नही भी​ रहती
​फिर भी हाथ जोड़कर
माफी मांग लेना जानता हुं..
ईसिलीये किसी बात का
गुमान नही करता ..
# संजय वासनिक “ वासु”...

18 comments:

  1. Very very nice poem

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  2. बहुत खूब।ऐसे ही लिखते रहिये।अरविंद।

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  3. सच है मै गुमान नही करता .......सरजी आपको प्रणाम ......

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  4. रणजित जाधवOctober 24, 2019 at 3:18 AM

    बहोत खूब सर..!

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  5. Very very nice poem sir...keep it up👏👏👏👏👏👏👏

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  6. खूप छान कविता

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  7. झुकना जिंदा होने का सबूत है, अकड़ तो मुर्दों में होती है।

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