Tuesday, October 22, 2019

हरियाणा से कवि राहुल लोहट की रचना- देखता हूँ


नाम-राहुल लोहट
विधा-काव्य
शीर्षक-देखता हूँ
पता:-राज्य-हरियाणा,जिला जीन्द

  *देखता हूँ*

मैं देखता हूँ,
हर बार
कम होते दीये
पिछली बार से,
देखता हूँ के
अस्तित्व से लड़ते,
खाली पानी के 
कुओं की मुंडेर
खाली हो रही है रोशनी से।
सुनसान सी
चौपाल की चौखट को
चिड़ा रही है
घूमने वाले लट्टू की
रंग बिरंगी लाईट।
देखता हूँ,
भरोसे जलती लम्बी रस्सी पर,
रचे जुगनू,
मंदिर के चारों ओर
चमकदार,टिम-टिम,
बटन पर अंगुठे के मोहताज,
ओन ऑफ के शौकीन,
इशारों के उजाले।
देखता हूँ के
निकलनी बदं हो गयी,
वो नटखटों की टोली,
जो लकड़ी से
घरों के बाहर लगी मोमबत्तियाँ
गिरा सिमेटती थी
लोहे के डिब्बे में।
देखता हूँ के
खांड के खील-खिलौने
लड़ाई में हार के मुकाम पर है,
रसगुल्लों की सेना से।
देखता हूँ
कहाँ गयी
वो दीवारों से कीलें,
जिनमें
पसंदीदा
हीरो-हीरोइनों की
तस्वीरे लटकाते थे चाव से।
देखता हूँ
रील वालेा नकली बंदूखड़ा
लेकर कोई भागता नहीं
गली से
ठैं ठैं करता हुआ,
नकली पिस्तौल भी रील नहीं
गोली मांगने लगा आज।
देखता हूँ
घर के दीपकों को
799 रुपये के रुम में
कैंडल डीनर में
अंधेरा करते हुए।
देखता हूँ ......
  ➖०➖
✍ *राहुल लोहट*

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...