कवि:- संजय वासनिक
शीर्षक:-गुमान
पता:- चेंबुर , मुंबई, महाराष्ट्र
भ्रमणध्वणी :- ९८६९०८१४८४.
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शीर्षक:-गुमान
पता:- चेंबुर , मुंबई, महाराष्ट्र
भ्रमणध्वणी :- ९८६९०८१४८४.
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गुमान
जानता हुं मै
ज़िन्दगी कभी भी
ले सकती है करवट,
ईसिलीये किसी बात का
गुमान नही करता ..
ज़िन्दगी कभी भी
ले सकती है करवट,
ईसिलीये किसी बात का
गुमान नही करता ..
गर छुलु मै बुलंदियाँ हज़ार,
मगर किसीके लीये कोई
गुनाह नही कर सकता
कोई और करे गुनाह तो
उसे सह नही सकता
ईसिलीये मै किसी बात
का गुमान नही करता
मगर किसीके लीये कोई
गुनाह नही कर सकता
कोई और करे गुनाह तो
उसे सह नही सकता
ईसिलीये मै किसी बात
का गुमान नही करता
कुछ बेतुके झगड़े,
कुछ इस तरहसे ,
खत्म कर देना चाहता हुं,
हमेशा हमेशा के लीये..
कुछ इस तरहसे ,
खत्म कर देना चाहता हुं,
हमेशा हमेशा के लीये..
जहाँ गलती नही भी रहती
फिर भी हाथ जोड़कर
माफी मांग लेना जानता हुं..
ईसिलीये किसी बात का
गुमान नही करता ..
# संजय वासनिक “ वासु”...
फिर भी हाथ जोड़कर
माफी मांग लेना जानता हुं..
ईसिलीये किसी बात का
गुमान नही करता ..
# संजय वासनिक “ वासु”...

its a nice poem...
ReplyDeleteVery truthful. Nice.
ReplyDeleteVery nice!
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteVery very nice poem
ReplyDeleteखुबसुरत कविता
ReplyDeleteNice poem guman janta hu me ..
ReplyDeleteAwesome .very true
ReplyDeleteबहुत खूब।ऐसे ही लिखते रहिये।अरविंद।
ReplyDeleteसच है मै गुमान नही करता .......सरजी आपको प्रणाम ......
ReplyDeleteबहोत खूब सर..
ReplyDeleteबहोत खूब सर..!
ReplyDeleteVery very nice poem sir...keep it up👏👏👏👏👏👏👏
ReplyDeleteNice poem sir
ReplyDeletenice poem
ReplyDeleteखूप छान कविता
ReplyDeleteझुकना जिंदा होने का सबूत है, अकड़ तो मुर्दों में होती है।
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