नाम--पवन गौतम बृजराही बमूलिया।
राज्य--राजस्थान।
सम्पर्क -9116488506
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विधा-कविता !! रस--ओज
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कविता (आजादी की मौज)
आज हिमालय की छाती
की पीर सुनाने आया हूँ ।
फिर से निकले कोई गंगा
नीर बहाने आया हूँ ।।
लैला को मजनूँ रांझा से
हीर मिलाने आया हूँ ।
खण्ड खण्ड भारत की मैं
तस्वीर दिखाने आया हूँ ।।
त्याग तपस्या और कुर्बानी
हाय सभी बेकार हुई ।
आजादी की मौज
गुलामी से ज्यादा दुश्वार हुई ।।
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अब ना कोई चन्दरशेखर
ओर ना राजगुरू होगा ।
यवनो से लडने वाला ना
झेलम वीर पुरू होगा ।।
जौहर के त्योहार तो जैसे
नानी की बातें होगी ।
आलम अंधकार का कायम
हाँ ! काली राते होंगी ।।
आज खडी सीमा पर सेना
बेबस हो लाचार हुई ।
आजादी की मौज
गुलामी से ज्यादा दुश्वार हुई ।।
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राजनीति वाचाल हो गई
नेता हुए खूब मक्कार ।
छीना झपटी हाथापाई
और संसद हैै शर्मोसार ।।
क्या गाँधी ने इसीलिए
थी खाई अंग्रेजों की मार ।
बालतिलक ने माँगा था क्या
ऐसा जन्म सिद्ध अधिकार ।।
मानवता जख्मी है और
घावों से ये चीत्कार हुई।
आजादी की मौज
गुलामी से ज्यादा दुश्वार हुई ।।
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हत्या चोरी और डकेती
जाति धर्म वाला भूचाल ।
किसने डाला दूध में खट्टेपन
का चुपके से कूचाल ।।
एक और रोटी के लाले
उस पाले में मालामाल ।
भूख मिटाने की मजबूरी
हवस भेडिए बने दलाल।।
हाय! यही कारण है फूलन सी
देवी खूंखार हुई ।
आजादी की की मौज
गुलामी से ज्यादा दुश्वार हुई ।।
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*राष्ट्रीय चिह्नो की स्थिति*
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'हॉकी' हारी 'मोर' तडपता
'बाघ' भागता जंगल से ।
गुमसुम है मासूम 'तिरंगा'
मंगल चिह्न अमंगल से ।।
'कमल' महकना छोड़ चुका है
'राजभवन' है दंगल से ।
'राष्ट्रगीत' और 'राष्ट्रगान' अब
गाये जाते जिंगल से ।।
'बट' की छाया को तडपे 'गौतम'
की करूण पुकार हुई।
आजादी की मौज
गुलामी से ज्यादा दुश्वार हुई ।।
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रचनाकार-पवन गौतम बृजराही बमूलिया।
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