संजय जैन (मुम्बई)
राज्य: महाराष्ट्रा
मो. 9987699021
विधा : कविता
शीर्षक: जिंदगी क्या है....
फूल बनकर मुस्कराना जिन्दगी है l
मुस्कारे के गम
भूलाना जिन्दगी है l
मिलकर लोग खुश
होते है तो क्या हुआ l
बिना मिले दोस्ती
निभाना भी जिन्दगी है l।
जिंदगी जिंदा दिलो
की आस होती है।
मुर्दा दिल क्या खाक
जीते है जिंदगी।
मिलना बिछुड़ जाना
तो लगा रहता है ।
जीते जी मिलते
रहना ही जिंदगी है।।
जिंदगी को जब तक
जिये शान से जीये।
अपनी बातो पर
अटल रहकर जीये ।
बोलकर मुकर जाने
वाले बहुत मिलते है।
क्योकि जमाना ही आज
कल ऐसे लोगो का है।।
मेहनत से खुद की
पहचान बनाकर,
जीने वाले कम
ही मिलते है ।
प्यार से जिंदगी जीने
वाले भी कम मिलते है।
वर्तमान को जीने वाले
ही जिन्दा दिल होते है।।
प्यार से जो जिंदगी
को जीते है।
गम होते हुए भी
खुशी से जीते है।
ऐसे ही लोगो की
जीने की कला को।
हम लोग जिंदा
दिली कहते है ।।
जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)
07/10/2019
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